22. नियामातुर रहमान

गंगा यमुनी संस्कृति को सशक्त और सुदृढ़ करने के लिए अपनी खास पहचान रखने वाले 1978 से 2006 तक लगातार मरघिया पंचायत के मुखिया रहे जनाब नियामातुर रहमान का नाम बरारी विधानसभा के सत्ता के गलियारों में बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। इनका जन्म चार जनवरी 1948 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनकी अम्मी का नाम स्व बीबी फुलवास और अब्बू का नाम स्व अब्दुल गफ्फार है। अपने नौ भाई बहनों में सबसे छोटे नीयामातुर साहब ने प्राथमिक विद्यालय सोफीचक, मरघिया और आदर्श मध्य विद्यालय गुरूबाजार से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी किया। जागेश्वर उच्च विद्यालय में पढ़ाई के दौरान तीन वर्षों तक टी. बी. बीमारी से पीड़ित हो जाने के कारण वह आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। छात्र जीवन में इन्हें अपने प्रधानाध्यापक सरदार छक्कु सिंह एवं अनुशासन प्रिय शिक्षक अब्दुल सुभान मौलवी का विशेष स्नेह प्राप्त था और यह लोग पढ़ाई के प्रति इन्हें लगातार प्रोत्साहित करते रहते थे लेकिन घरेलू परिस्थितियों और अस्वस्थ होने के कारण इन्हें पढ़ाई छोड़ कर अपने परिवार के कृषि कार्य में सहयोग करने को मजबूर होना पड़ा। इनके छात्र जीवन के सहपाठी डॉक्टर पुरुषोत्तम अग्रवाल, जनार्दन भगत, पूर्व विधायक प्रेमनाथ जयसवाल, रिटायर्ड इंस्पेक्टर सुखदेव सिंह, पंचानंद कुमार आदि रहे हैं और 1961 में भारत स्काउट और गाइड बिहार के द्वारा इन्हें राज्य स्तर पर पुरस्कृत भी किया गया है। दरअसल नियामातुर साहब बैडमिंटन, वॉलीबॉल और फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे तथा फुटबॉल के लिए इन्हें पूर्णिया जिला का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था।

अपने आसपास के लोगों के सहयोग करने की भावना नियामातुर साहब की एक विशिष्ट खासियत थी और 1971 में कम्युनिस्ट पार्टी के जिला अध्यक्ष रामानंद झा के करीबी और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में भी इनका अपने क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान था। यही कारण है कि अपने पंचायत के लोगों की मांग पर इन्हें त्रिस्तरीय पंचायती राज के अंतर्गत मुखिया का चुनाव लड़ना पड़ा और 5 जून 1978 को ऊंट छाप चुनाव चिह्न से विजयी होकर इन्हें मरघिया पंचायत का मुखिया बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद नियामातुर साहब 2006 तक अनवरत इस पंचायत के मुखिया रहे। इनकी लोकप्रियता का ही यह परिणाम है कि 2011 से वर्तमान समय 2021 तक इनकी बेगम मरजेमा खातून को भी मुखिया बनने का सौभाग्य प्राप्त है। 1980-84 के दौरान भारतीय जनता पार्टी के जिला कमेटी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का जिला संयोजक रहे नियामातुर साहब 2001-06 के समयावधि में बरारी प्रखंड के मुखिया संघ के अध्यक्ष भी रहे हैं। अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक के रूप में कार्य करने के दौरान इन्हें जन संघ के कार्यकर्ता भागवत यादव, जय कृष्ण यादव, मधुसूदन मेहता आदि का भरपूर सहयोग भी प्राप्त हुआ था।

मरघिया पंचायत के मुखिया रहते हुए इन्होंने अपने पंचायत के सभी गांव में पक्की सड़कों का निर्माण करवाया। प्राथमिक विद्यालय सोफिचक के निर्माण के लिए अपनी पुश्तैनी चालीस डिसमिल जमीन दान देकर इसका निर्माण करवाया। खूबसूरत पंचायत भवन और राजीव भवन का निर्माण भी इनकी एक विशेष उपलब्धि रही है।  2017-18 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत वैशाखा पुल से नीचा टोला, सदर टोला, तिवारी टोला होते हुए सोफीचक उप स्वास्थ्य केंद्र  तक सात किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव और तत्कालीन विधायक विभाष चंद्र चौधरी के सहयोग से इन्होंने वैशख़ा घाट पुल का निर्माण करवाकर अपने क्षेत्र के लोगों की एक जटिल समस्या का भी समाधान किया। जोनीया, कुर्सेला, बरंडी दाया तटबंध एवं nh31 से मधेली तक सड़क निर्माण हेतु इनके द्वारा दर्जनों बार पत्राचार किया गया। अपने निजी जमीन में शमशेर टोला को स्थापित कर 40 से ज्यादा परिवारों का पुनर्वास किया गया। मध्य विद्यालय सोफीचक में अपने निजी कोष और ग्रामीणों के सहयोग से दो कमरों का भवन निर्माण करवाया गया। अपने पंचायती फंड से तिवारी टोला, हाकिम टोला, बिलायमारी पट्टी स्थित प्राथमिक विद्यालय में भवन निर्माण करवाया गया। उप स्वास्थ्य केंद्र मरघिया और सामुदायिक भवन मरघिया का निर्माण इनके ही प्रयास से अपनी मामा मास्टर वारेसतुल्लाह के निजी जमीन को दान दिलवाकर करवाया जा सका। सॉफिचक, पासवान टोला, तिवारी टोला, मुसहरी आदि में पंचायत फंड से हरिजन के लिए शेड चबूतरो का निर्माण भी इनकी विशेष उपलब्धि रही है। मरघिया पोस्ट ऑफिस के लिए भी इन्होंने 2 डिसमिल जमीन में भवन निर्माण कर दान दिया है। चेथड़िया पिड़ बरांडी नदी में आरसीसी पुल के निर्माण हेतु भी इनके द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। इमानदारी से जनता की सेवा करने वाले नियामातुर साहब प्रतिवर्ष अपने निजी फंड से छठ व्रतियों के लिए सभी प्रकार की सुविधाओं की व्यवस्था करवाते रहे हैं। अपने जीवन काल में 7000 से ज्यादा पंचायती कर इन्होंने समाज के लोगों के बीच आपसी भाईचारा कायम रखने का लगातार प्रयास किया है।

अपने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में इन्हें गरीब, दलित, पिछड़े और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ है। कद्दावर नेताओं में पूर्व सांसद निखिल चौधरी, पूर्व अल्पसंख्यक मंत्री बिहार सरकार जनाब मंसूर आलम, पूर्व विधायक प्रेमनाथ जयसवाल, वर्तमान विधायक नीरज कुमार, पूर्व मुखिया संतराम सिंह और स्वर्गीय दीनानाथ पाठक, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, बिहार सरकार में पूर्व मंत्री कर्णेश्वर सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता कमलेश्वरी मंडल, राजद के नेता समरेंद्र कुणाल आदि का भी इन्हें भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ है। नियमातुर साहब का विवाह 1963 में मोहतरमा मरजेमा खातुन से हुआ। तीन लड़कों मोहम्मद तौफीक (पंचायत शिक्षक), रफीक आलम(पोस्ट मास्टर), मोहम्मद सफिक आलम (सॉफ्टवेयर इंजीनियर) और एक मात्र लड़की सफिना खातुन (पूर्णिया जिला के चांदी पंचायत की मुखिया) के पिता नीयमातुर साहब आज भी अपने दरवाजे पर आए जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए लगातार समर्पित रहते हैं।

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