11. श्रीमती माला देवी

बरारी के वर्तमान प्रखंड प्रमुख एवं कटिहार में जदयू के महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष श्रीमती माला देवी बरारी विधानसभा में महिला सशक्तिकरण के लिए एक मिशाल है। घर की चहारदीवारी से बाहर निकल कर समाजसेवा और राजनीति में अपनी सक्रियता से इन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इनका जन्म 1979 में मधेपुरा जिला के उदाकिशुनगंज एक संपन्न परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती सविता देवी और पिता का नाम श्री युगल किशोर चौधरी है। इनके पिताजी को अपने पंचायत का दो बार मुखिया, एक बार उप मुखिया और एक बार सरपंच बनने का सौभाग्य प्राप्त था। अपने चार भाई बहनों में सबसे छोटी श्रीमती माला के जन्म से इनके पिताजी सबसे ज्यादा खुश थे। घर में काम करने वाली दाईं भी इसे खूब प्यार करती थी और उसी ने घरवालों से आग्रह कर इसका नाम माला रखवाया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा अपने गांव के विद्यालय में हुई। यह बचपन से गायन - वादन और नृत्य - संगीत में विशेष रूचि रखती थी। इसके एक बड़ा कारण घरेलू माहौल भी था। इनके पिताजी भी केशियो बेंजो बजाते थे और संगीत नृत्य में काफी रुचि रखते थे। श्रीमती माला जब छठी कक्षा में पढ़ती थी तो कला भवन पूर्णिया में नृत्य कला के लिए इन्हें शारदा सिन्हा के द्वारा पुरस्कृत किया गया था। इसकी बड़ी बहन तनुजा चौरसिया ने गीत संगीत के बदौलत राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने में सफलता प्राप्त किया है। 1994 में उच्च विद्यालय शाजादपुर से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद यह आगे पढ़ाई कर दरोगा बनाना चाहती थी लेकिन मां की बीमारी के कारण परिवार वालों ने बरारी के मशहूर समासेवी श्री अरविंद कुमार से 14 जुलाई 1997 को इनका धूमधाम से विवाह कर दिया। वैवाहिक जीवन में व्यस्तता और अपने दो बच्चों अनुज और हर्ष के परवरिश की जिम्मेदारियों के बीच इन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखा और स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की।

2011 में अपने पति के द्वारा प्रोत्साहन पाकर और पंचायत चुनावों में महिला आरक्षण के प्रावधान से उत्साहित होकर इन्होंने पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ा लेकिन बहुत कम वोटों से चुनाव हार गई। 2016 में आस - पड़ोस के बड़े बुजुर्गों के दवाब में इन्हें एक बार फिर से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ना पड़ा और इस बार जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने में इन्हें सफलता प्राप्त हुई। आगे चलकर 2018 में प्रखंड के तेंतीस में से इक्कीस पंचायत समिति सदस्यों के समर्थन से यह प्रखंड प्रमुख बनने में भी सफल हुई। भारतीय संस्कति और संस्कारों में दृढ़ विश्वास रखने वाली और राजनीति में नीति, नियम और सिद्धांत से कोई समझौता नहीं करने वाली श्रीमती माला गरीबों, पिछड़ों दलितों और महिलाओं की समस्याओं के समाधान हेतु काफी सक्रिय रहती है। इसके फलस्वरूप इन्हें जदयू में कटिहार के महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। केंद्र सरकार की  पूर्वी बारी नगर स्थित पच्चीस एकड़ कृषि फार्म की जमीन पर काढ़ागोला घाट के कटाव पीड़ितों और विस्थापित लोगों का पुनर्वास के लिए श्रीमती लगातार संघर्ष कर रही हैं।

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