2. शालिग्राम यादव
बेहद ही शांत, मृदुभाषी, सभी से दोस्ताना व्यवहार करने वाले निर्भिक प्रवृति के प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी श्री शालिग्राम यादव बरारी विधानसभा के सत्ता के गलियारों में किंग मेकर के रूप में अपनी खास पहचान रखते हैं। "शालिग्राम" नाम उनके गांव ग्राम के मामा विश्वनाथ यादव के द्वारा रखा गया था। इनका जन्म बरारी प्रखंड मुख्यालय के समीप लेकिन अत्यंत पिछड़ा रोनियां गांव में चौदह जनवरी 1964 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता श्रीमती गंगिया देवी (गंगा देवी) बहुत ही दयालु प्रवृत्ति की महिला थी। अपने गांव के गरीब गुरबों की मदद के लिए वह अक्सर दिन का भोजन बनाने से पहले कुछ चावल डब्बा में निकालकर जरूरतमदों के बीच बांट दिया करती थी। उनकी यही दयालु प्रवृत्ति और समाज के लोगों का हमेशा मदद करने के व्यवहार से प्रभावित होकर श्री यादव के अंदर समाजसेवा की भावना का विकास हुआ। उनके पिता स्मृति शेष श्री खंतर यादव एक साधारण किसान थे। अपने छह भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आनेवाले श्री यादव बचपन से एक मेधावी छात्र थे। उस समय उनके गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई प्राथमिक विद्यालय भी मौजूद नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने 1988 में कटिहार के प्रतिष्ठित डी. एस. कॉलेज कटिहार से बॉटनी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। किसान परिवार से ताल्लुक रखने के कारण पढ़ाई के दौरान इन्हें काफी आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। ऐसे में एल आई सी एजेंट के रूप में कार्य करने वाले विश्व नाथ पोद्दार ने अपने आवास पर उन्हें आश्रय देकर उनकी काफी मदद की। उस समय डी. एस. कॉलेज में एडमिशन लेना काफी कठिन कार्य होता था। उनके साथ बॉटनी फैकल्टी में महज ग्यारह छात्र छात्राओं को महाविद्यालय प्रशासन ने प्रवेश दिया था। 1982 में जागेश्वर उच्च विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद उनका चयन फौज की नौकरी में हो गया लेकिन समाजसेवा की भावना ने महज एक माह बाद उन्हें यह नोकरी छोड़ने के लिए विवश कर दिया। वापस लौटकर उन्होंने बी. एम. कॉलेज बरारी में लैब टेक्नीशियन के रूप में कई वर्षों तक अपनी सेवा दी।
बाद में उन्होंने लैब टेक्नीशियन के पद से त्यागपत्र देकर रौनिया पंचायत से मुखिया पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर पहली बार चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। अपने मां के दयालु प्रवृत्ति के पुण्य प्रताप से पंचायत के लोगों ने गंगिया देवी के बेटा को भारी मतों से मुखिया बना दिया। दरसअल उस समय उनके पंचायत के अधिकांश लोग उन्हें उनके नाम से ज्यादा गंगिया के बेटा के रूप में जानते थे। मुखिया बनते ही इन्होंने पहली बार गांव में पक्की सड़क का निर्माण करवाया और दस से ज्यादा सड़कों (लगभग पंद्रह किलोमीटर का) ईंट सोलिंग करवा कर गांव में विकास की एक नई शुरुआत की। पंचायत के विकास का जुनून उन पर कुछ इस कदर हावी था कि अपने निजी फंड से बालेश्वर यादव का जमीन केवाला करवाकर दलित टोला में पक्की सड़क का निर्माण करवाया। बिजली की बात तो छोड़ दें, गांव के लोगों के पास रात के अंधेरे को दूर करने के लिए किरोसीन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं था, ऐसे में अपने निजी फंड से पंचायत के सभी टोला में सौ से ज्यादा गेस लाइट का वितरण करवाया। गौरतलब है कि 2003 में इनके प्रयास से ही तात्कालीन स्थानीय विधायक और बिहार सरकार के अल्प संख्यक राज्य मंत्री जनाब मंसूर आलम ने गांव के काली मंदिर प्रांगण में प्राथमिक विद्यालय के लिए दो कमरों का भवन निर्माण हेतु फंड उपलब्ध करवाया था। 2005 में तत्कालीन सांसद आर. के. राणा के सौजन्य से अपने पंचायत के प्रत्येक वार्ड में हवा महल का भी निर्माण करवाया गया।
इसके बावजूद अगले चुनाव में पंचायत हरिजन कोटा के अन्तर्गत आरक्षित हो जाने के कारण उन्हें अपना यह पद गंवाना पड़ा लेकिन राजद के लिए उन्होंने हमेशा सक्रिय कार्यकर्ता की भूमिका का निर्वहन किया। सांसद नरेश यादव के समय 1995 में इन्हें राजद युवा के प्रखंड अध्यक्ष के रूप में विशेष पहचान प्राप्त था। 2004 में पहली बार बरारी से राजद के प्रखंड अध्यक्ष बने तो लगातार आठ वर्षों 2012 तक प्रखंड अध्यक्ष के रूप में संगठन के दायित्वों का सफ़लता पूर्वक निर्वहन करते रहे। 2015 में इन्हें बरारी विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा राजद उम्मीवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए ऑफर किया गया लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। 2016 में जब पंचायत का मुखिया पद आरक्षण मुक्त हुआ तो ग्रामीणों के दवाब में उन्हें नामांकन दाखिल करवाना पड़ा और पंचायत की जनता ने उन्हें फिर से मुखिया पद से सम्मानित किया। श्री यादव राजद के सक्रिय कार्यकर्ता होने के बावजूद कई बार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता के कल्याार्थ अन्य पार्टी उम्मीदवारों का भी सहयोग करते रहे हैं। यही कारण है कि वर्तमान जदयू सांसद दुलाल चन्द्र गोस्वामी, भाजपा के एम एल सी अशोक अग्रवाल, पूर्व विधायक विभाष चन्द्र चौधरी के अलावे अन्य पार्टी के कई नेताओं से इनका घनिष्ठ संबंध है।
कटिहार जिला के वर्तमान राजद अध्यक्ष श्री तारकेश्वर ठाकुर जी, पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर यादव, रामलगन राय, विश्वनाथ सिंह, पूर्व राज्यसभा सांसद श्री नरेश यादव, पूर्व मंत्री जनाब मंसूर आलम, पूर्व सांसद रामशरण यादव, पूर्व सांसद अनिल यादव, पूर्व सांसद डॉक्टर आरके राणा, पूर्व मंत्री महेंद्र नारायण यादव, सीताराम दास, हिमराज सिंह, प्रोफेसर रामप्रकाश महतो, वर्तमान में राजद के माननीय राज्यसभा सदस्य अहमद अशफाक करीम एवं बरारी के माननीय विधायक श्री नीरज कुमार यादव जी के साथ सक्रिय रहकर पार्टी संगठन को धारदार बनाने में श्री यादव की भूमिका को प्रदेश नेतृत्व भी काफी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
मृदुभाषी और उच्च शिक्षा प्राप्त कद्दावर नेता होने के कारण प्रखंड और जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा इनका खास सम्मान किया जाता है। बरारी के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी रामकुमार पोद्दार और वर्तमान डी आर डी ए के निदेशक, कटिहार के पूर्व जिलाधिकारी ललन कुमार आदि से इनकी ख़ास घनिष्ठता रही है। अपने तीन दशक के राजनीतिक अनुभव और अपने दरवाजे पर मदद के लिए दस्तक देने वाले प्रत्येक जरूरतमंदो का हरसंभव सहयोग करने वाले श्री यादव बरारी विधानसभा के बुनियादी सुविधाओं की लचर व्यवस्था से काफी निराश हैं। प्रखंड मुख्यालय के किसी स्टाफ के लिए उचित सरकारी आवास नहीं होना उन्हें काफी खटकता है। श्री यादव आने वाले समय में बरारी को अनुमंडल बनते देखना चाहते हैं।
राजद से आज भी उनका खास जुड़ाव है और आने वाले समय में पार्टी द्वारा दी जाने वाली जिम्मेदारियों को निभाने से उन्हें कोई ऐतराज़ नहीं है। श्री यादव का ज्येष्ठ पुत्र बंटी बिहारी केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। मंझला पुत्र मनमोल बिहारी हिंदी और अंग्रेजी से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त कर सरकारी सेवा में जाने के लिए प्रयासरत हैं। सबसे छोटा पुत्र अनमोल बिहारी बी. एड . कर शिक्षक बनना चाहते हैं।
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