4. बबीता कुमारी

अत्यंत मिलनसार, गरीबों और जरूरतमदों के हरसंभव मदद के लिए हमेशा सक्रिय, मृदुभाषी लेकिन ओजस्वी वक्ता, भारतीय जनता पार्टी और अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन की राष्ट्रीय सचिव की उभरती हुई नेत्री श्रीमती बबीता कुमारी बरारी विधानसभा के लोगों के लिए किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। राजनीति और समाजसेवा में इनकी सक्रियता का ही यह नतीजा है कि बहुत ही कम समय में भाजपा के बिहार प्रदेश के संगठन मंत्री जी नागेन्द्र सिंह जी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, बिहार के भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव, उपमुख्यमंत्री शुशील मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, भाजपा सांसद रामकृपाल यादव, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, संगठन महामंत्री राधामोहन शर्मा, आर. एस. एस. के क्षेत्रीय प्रभारी सूबेदार जी आदि के बीच इनकी एक तेजतर्रार प्रखर महिला नेत्री के रूप में एक विशिष्ट पहचान है। इनका जन्म बरारी के एक किसान परिवार में 10 मार्च 1978 को हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती यशोदा देवी एवं पिताजी का नाम श्री हरिमोहन प्रसाद यादव है। अपने चार भाई बहनों में तीसरे नंबर पर आने वाली बबीता बचपन से ही काफी चंचल स्वभाव की थी। इसलिए इनके दादाजी शिक्षक भूटकू प्रसाद यादव (गुरुजी) इन्हें बसंती नाम से पुकारते थे। परिवार और आस पड़ोस के लोग बचपन में इन्हें प्यार से  बुलबुल बुलाते थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा गुरुनानक कन्या मध्य विद्यालय बरारी में हुई। 1993 में गुरुनानक कन्या उच्च विद्यालय से प्रथम श्रेणी से मैट्रिक उत्तीर्ण करने के बाद मामाजी और कटिहार में फिजिक्स के प्रोफेसर  जे पी यादव की सलाह पर इन्होंने सुर तुलसी कॉलेज कटिहार से इंटर की परीक्षा 1995 में उत्तीर्ण किया। आगे चलकर इन्होंने स्नातक तक  की  भी पढ़ाई  किया। अपने छात्र जीवन से इन्हें खेल, गीत - संगीत और नृत्य में काफी रुचि  थी और इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के कारण इन्हें कई बार पुरस्कारों से भी नवाजा गया है।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने की तमन्ना के बावजूद 5 जून 2002 को इनका विवाह राजद के प्रभावशाली नेता नीरज कुमार कश्यप उर्फ हिटलर यादव से कर दिया गया। शादी के कुछ दिनों पहले श्री यादव के जिंदगी में उतार चढ़ाव होने के कारण  जहां परिवार के लोगों को भी इस शादी से आपत्ति थी वहीं अपने आस पड़ोस में विवाहिता के साथ होने वाली घरेलू हिंसा का इनके मन में इतना खोफ था कि इन्हें खुद भी शादी से एतराज था। ससुराल में बड़ी बहु होने के कारण शुरुवाती संघर्ष के बाद पति और ससुराल वालों से मिलने वाले अपार स्नेह और सहयोग ने बबीता की जिंदगी ही बदल कर रख दिया। राजनीति और समाजसेवा में पति की सक्रियता और उन्हें आम जनता से मिलने वाले प्यार और सम्मान से यह इतना प्रभावित हुई कि यह खुद भी समाजसेवा के कार्यों में पति का हाथ बंटाने लगी।
इसी बीच त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव में  आने से इन्हें सक्रिय राजनीति में भी आने का अवसर प्राप्त हो गया। 2006 में मुखिया और समिति का चुनाव एक साथ लड़ने वाली श्रीमती बबीता को जनता का पुरा आशीर्वाद मिला लेकिन एक सौ पच्चीस से ज्यादा उन्हें चाहने वाले वोटरों द्वारा मुहर की जगह अंगूठे का निशान अंकित कर दिए जाने से इन्हें अपने पहले चुनाव में महज ग्यारह वोट से हार का मुंह देखना पड़ा। 2007 में इनका चयन प्रखंड शिक्षिका के रूप में हो गया लेकिन इन्हें चाहने वाले लोगों के दवाब में सरकारी सेवा से इस्तीफ़ा दे कर पंचायत के मुखिया पद का चुनाव लड़ना पड़ा। हालांकि इस बार भी इन्हें सफलता प्राप्त नहीं हुई और इस बार भी दूसरे स्थान से इन्हें संतोष करना पड़ा लेकिन राजनीति और समाजसेवा से इनका लगाव बढ़ता गया।

  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से यह इतना प्रभावित हुई कि 2016 में इन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी ग्रहण कर लिया। एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में गरीबों के बीच कंबल वितरण, श्राद्ध कर्म अथवा लड़की की शादी में आर्थिक सहयोग, बाढ़ के समय पीड़ितो के बीच राहत सामग्री का वितरण, बरारी में होने वाले सांस्कृतिक, क्रीड़ा प्रतियोगिता और धार्मिक आयोजन में तन,मन और धन से सहयोग करना इनकी आदत में शुमार है। नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर इन्होंने नमामि गंगे के तहत अपने निजी फंड से सार्वजनिक स्थानों पर आम जनता की सुविधा की दृष्टिकोण से शौचालय बनाने का भी इन्होंने बीड़ा उठाया है। इसके अलावा एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में द्वारा केंद्र सरकार प्रायोजित महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रचार प्रसार में इनकी महती भूमिका रही है। इनके द्वारा बरारी के गांव कस्बे में घूम घूम कर केंद्र सरकार की योजनओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचा ये जाने से इनका कद लगातार बढ़ता ही चला आया है।

इनकी इसी सक्रियता के कारण 19 फरवरी 2017 को दिल्ली के मावलंकर हाल में आयोजित सभ्यता संस्कृति और संरक्षण पर संवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम में दबंग फिल्म के डायरेक्टर अभिनव कश्यप के द्वारा इन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात इन्हें अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया और इनके बेहतर कार्य के फलस्वरूप इन्हें प्रोन्नति देते हुए राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपने पति से राजनीतिक विचारधारा में मतभेद के बावजूद समाज और जनता की सेवा और भलाई से संबंधी कार्यों में दलगत भावना से ऊपर उठकर इनके पति के द्वारा सहयोग किया जाता है। अपने राजनीतिक गतिविधियों एवं सामाजिक कार्यों में सक्रियता के बीच यह अपने दोनों बच्चों रजत कुमार कश्यप और सुब्रत कुमार कश्यप के उचित परवरिश पर पुरा ध्यान देती है।

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