7. विभाष चन्द्र चौधरी

बरारी विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी का एकमात्र विधायक, मशहूर अधिवक्ता और गंगा दियारा क्षेत्र में शांति और अमन स्थापित करने, एवं अपने विकास कार्यों से बरारी विधानसभा में विकास की एक नई धारा के प्रवाहित करने के लिए अपनी खास पहचान रखने वाले पूर्व विधायक श्री विभाष चंद्र चौधरी बरारी के लोगों के बीच एक अत्यंत लोकप्रिय नाम हैं। इनका जन्म 21 जनवरी 1954 को अपने ननिहाल रांची में हुआ था। इनकी माता का नाम स्व. धानेश्वरी देवी है। इनके पिताजी स्व. रायचंद चौधरी भवानीपुर जोतराम राय स्टेट के जमींदार थे और जिन्हें जोतराम राय भवानीपुर पंचायत में लगातार बाईस वर्षों तक मुखिया बनने का सौभाग्य प्राप्त था। अपने माता पिता के कुल छह संतानों में चोथे नंबर पर आने वाले श्री चौधरी बहुत छोटी आयु से जनसंघ की विचारधारा से प्रभावित थे। दरअसल जब इनकी आयु महज आठ- नो वर्ष की थी, तभी इनके पिताजी मोतियाबिंद बीमारी से पीड़ित हो गए। ऐसे में अपने पिताजी को आर्यावर्त और प्रदीप अख़बार पढ़ कर सुनाने की ड्यूटी इनकी ही थी। छोटी उम्र से देश दुनिया की खबरों और संपादकीय पढ़ने के इसी नियमित आदत के कारण इनका बौद्धिक और राजनीतक चेतना का विकास हुआ। 1970 में इन्होंने है-हय क्षत्रिय भवानीपुर जोतराम राय उच्च विद्यालय से मैट्रिक पास किया, जिसका निर्माण स्थानीय चौधरी समाज के द्वारा किया गया था। बी. एन. कॉलेज पटना से इंटर की पढ़ाई के दौरान इनकी मित्रता वर्तमान केंद्रीय कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद से हो गई। रिटायर्ड डीआईजी श्री मृत्युंजय कुमार, नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद डीएसपी अखिलेश सिंह और प्रोफेसर तिर्पुरारी शर्मा भी इनके करीबी सहपाठी थे। 1972-74 में पटना कॉलेज से भूगोल प्रतिष्ठा से स्नातक और 1974-76 में पटना विश्वविद्यालय से एल. एल. बी. के साथ भूगोल विषय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले श्री चौधरी अपने कालेज लाईफ से ही छात्र राजनीति और जे. पी. आंदोलन में सक्रिय रहे। 1970 में पढ़ाई के लिए पटना आते ही संघ के स्वयंसेवक बन गए और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर छात्र राजनीति में भी सक्रिय हो गए। इस दौरान इनका संघ के हथुआ हॉस्टल शाखा, बाल किशुनगंज और राजेंद्र नगर शाखा में आना जाना होता था। 1972 में इन्हें पटना नगर का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का संगठन मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्हें वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राजाराम पांडे, वर्तमान केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, वर्तमान पथ निर्माण मंत्री श्री नंदकिशोर यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू यादव, वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, पूर्व मंत्री बिहार सरकार श्री नरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद स्वर्गीय शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव, प्रोफेसर निशांत केतु जी, वरिष्ठ पत्रकार इंद्रजीत सिंह और स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण सहित जेपी आंदोलन के कई दिग्गजों से संपर्क में आने का अवसर प्राप्त हुआ। 1972 में ही विद्यार्थी परिषद का धनबाद में अधिवेशन हुआ था। इसी दौरान संघ के तत्कालीन विभाग प्रचारक श्री गोविंदाचार्य और बीएचयू के छात्र नेता एवं वर्तमान में वरिष्ठ पत्रकार श्री राम बहादुर राय के सान्निध्य में आकर श्री चौधरी को जनसंघ की विचारधारा को काफी करीब से समझने का मौका मिला।

9 फरवरी 1972 को श्री चौधरी के नेतृत्व में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं के समाधान हेतु बिहार विधानसभा के समक्ष विद्यार्थी परिषद के द्वारा प्रदर्शन के दौरान इनके साथ इनके कई साथियों को गिरफ़्तार कर लिया गया। श्री चौधरी के साथ सर्व श्री सुशील मोदी, रविशंकर प्रसाद, सरयुग राय, त्रिपुरारी शर्मा सहित दर्जनों छात्र नेताओं को भी गिरफ्तार कर बांकीपुर सेंट्रल जेल पटना भेजा गया था।  जिसकी ख़बर आर्यावर्त में छपी और गिरफ़्तार छात्रों में पहला नाम श्री चौधरी का था। इस प्रकार पहली बार घर के लोगों को इनके राजनीतिक सक्रियता की जानकारी आर्यावर्त समाचार पत्र के द्वारा प्राप्त हुई। घर के लोगों ने कोई खास ऐतराज़ तो नहीं जताया लेकिन इनकी मां ने कुछ दिनों तक खाना पीना बिल्कुल भी छोड़ दिया। इसके बाद इन्हें कई बार छात्र राजनीति और जे. पी. आंदोलन के कारण जेल जाना पड़ा। आपातकाल की समाप्ति के पश्चात 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी और स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बनें। सरकार द्वारा पटना विश्वविद्यालय की सीनेट में पटना विश्वविद्यालय के क्लास रिप्रजेंटेटिव के मतदान से चयनित पांच छात्रों को सदस्य के रूप में स्थान दिया गया। इस चुनाव में श्री रविशंकर प्रसाद के साथ श्री चौधरी भी चुनाव जीतकर सीनेट के सदस्य बने। यह छात्र राजनीति में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। यह खबर उस समय के सभी मुख्य समाचार पत्रों के साथ ऑल इंडिया रेडियो के प्रादेशिक समाचार में भी प्रसारण किया गया था।

वकालत की डिग्री लेने के पश्चात लगभग एक वर्षों तक पटना उच्च न्यायालय में स्वर्गीय ए. के. दत्ता के अधीनस्थ इनके द्वारा वकालत किया गया। समाज सेवा की भावना और अपने क्षेत्र की विकास की तीव्र इच्छा के कारण एमएलए बनने की दृढ़ इच्छा के साथ यह वापस कटिहार लौट गए और व्यवहार न्यायालय कटिहार में वकालत प्रारंभ किया। अपने 25 वर्षों के वकालत के दौरान इन्होंने गरीबों पिछड़ों और दबे कुचले शोषित पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए उनके मुकदमे की पैरवी की। इसके साथ ही वह राजनीति में भी सक्रिय रहे एवं संगठन के कार्यकर्ता के रूप में जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा का जमीनी स्तर पर प्रचार प्रसार करते रहे। इनकी कर्मठता और परिश्रम के फलस्वरुप पार्टी में इन्हें 1995 से 2005 के बीच तीन बार जिला अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इनकी लोकप्रियता और प्रोत्साहन से इनकी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी देवी 2001 में सेमापुर पूर्वी क्षेत्र से जिला पार्षद सदस्य बनी। इसके बाद पंचायत समिति का चुनाव जीतकर श्रीमती चौधरी को बरारी प्रखंड का प्रखंड प्रमुख बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान इनका कार्यपद्धति और विकास कार्य ने जनता में इनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ा दिया। जिसके फलस्वरूप श्री चौधरी 2005 के अक्टूबर और 2010 में बरारी विधानसभा का चुनाव जीत कर विधायक बने। उस समय बरारी विधानसभा के बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अत्यंत जर्जर थी । अपने प्रथम विधायी काल में इन्होंने अपने प्रयास से विधानसभा क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का भरपूर प्रयास किया। इनके प्रयास से फुड फॉर वर्क योजना के अंतर्गत जिला को आवंटित 18 करोड़ में लगभग 10 करोड़  बरारी विधानसभा के विकास कार्यों में खर्च किया गया। सुखासन में अमतुल्ली घाट, सेमापुर के सिक्कट में रेलवे के समानांतर, समेली के खैरा में एनएच मार्ग के बीच, सेमापुर से कावड़ जाने के रास्ते में, मधुबनी मोड़ पर, मोहना चांदपुर में, आरसीसी पुलिया और मधेली गांव के धार में, कोलासी से सुखासन जाने के मार्ग में मधुरा धार में लोहा पुल आदि के निर्माण के साथ लगभग 30 किलोमीटर ईंट सोलिंग करवाया गया। बालु घाट स्थित पुल का निर्माण बरारी विधानसभा के लिए अविस्मरणीय है। मुख्य मंत्री सड़क योजना एवं प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत लगभग ढ़ाई सौ किलोमीटर पक्की सड़कों का जाल बिछाया जा सका। मुख्यमंत्री सेतु योजना एवं सम विकास योजान्तर्गत कई पुल पुलियों का भी निर्माण करवाया गया। भगवती मंदिर कॉलेज बरारी के अध्यक्ष पद पर आसीन रहते हुए इन्होंने कालेज के भवन निर्माण कार्य को सम्पन्न करवाया। इनके प्रयास से कई प्रारंभिक विद्यालयों को उत्क्रमित करवाया गया। इसके बावजूद इन्हें 2015 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के राजद उम्मीदवार नीरज कुमार से बहुत कम मतों के अंतर से पराजय झेलना पड़ा।

जगबंधु अधिकारी को अपना राजनीतिक गुरु और अटल बिहारी वाजपेई को अपना आदर्श मानने वाले श्री चौधरी बागवानी, साहित्य, आध्यात्मिक लेखन आदि का भी शौक रखते हैं। इनके परिवार में इनकी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी देवी (पूर्व प्रखंड प्रमुख, बरारी), तीन पुत्र कुणाल प्रियदर्शी (श्री साईं पेट्रोल पंप, हसनगंज के प्रोपराइटर), मृणाल प्रियदर्शी (शाखा प्रबंधक, आईडीएफसी बैंक इंदौर) राहुल प्रियदर्शी (बीसीए) और दो पुत्रवधु निशा कुमारी और मोविसा पांडेया (पीओ, इंडस बैंक इंदौर)हैं।

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