8. श्री राजीव कुमार जायसवाल
श्री राजीव कुमार जायसवाल एक संगठन कर्ता के रूप में राष्ट्रीय फलक पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले कटिहार जिला के एक ऐसे शख्सियत हैं, जिन्हें जनता दल, भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, एवं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और वर्तमान में नेशनल पीपुल्स पार्टी के बिहार झारखंड में राष्ट्रीय सचिव सह राष्ट्रीय संयोजक के रूप में राष्ट्रीय स्तर का पदाधिकारी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। खगड़िया संसदीय क्षेत्र से पूर्व सांसद श्रीमती रेणु कुमारी सिंह के सांसद प्रतिनिधि के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले श्री राजीव कुमार जायसवाल वर्तमान में मदर टेरेसा नर्सिंग स्कूल के महाप्रबंधक, गांधी एजुकेशनल ट्रस्ट के सचिव, जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी विशिष्ट कार्यशैली के लिए भी जाने जाते हैं। श्री जायसवाल पूर्व में एनडीए के लिए नॉर्थ ईस्ट में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। श्रीमती रेणु कुमारी सिंह के सांसद प्रतिनिधि के रूप में बरारी के बकिया, काबर, शिशिया आदि सहित सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में सांसद निधि से बहुत सारी विकास योजनाओं का कार्यान्वयन करवाया है। वर्तमान में सुखासन में कारी कोशी पर निर्मित बालू घाट पुल के सर्वे का कार्य इनके प्रयास से ही सांसद निधि के फंड से दो लाख रुपए खर्च कर किया गया था। वर्तमान लोकसभा के स्पीकर श्री ओम बिरला, शिवहर की सांसद श्रीमती रमा देवी, बेतिया के सांसद एवं बिहार के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय जायसवाल, वर्तमान केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, वर्तमान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आदि कद्दावर नेताओं के सहयोगी और करीबी रहे श्री जायसवाल को बिहार के राजनीतिक गलियारों में कई विधानसभा सदस्य और सांसद को उनके क्षेत्र का चुनाव प्रभारी रहते हुए विजय दिलाने का भी श्रेय प्राप्त है।
श्री जायसवाल का जन्म 23 अप्रैल 1967 को बरारी प्रखंड के बकिया भवानीपुर में एक किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय चिंतामणि देवी है। इनके पिता का नाम स्वर्गीय सीता राम प्रसाद जयसवाल है, जो किराना स्टोर के बड़े थोक ब्रिकेता व्यवसाई भी थे। अपने माता-पिता के पांच संतानों में श्री जायसवाल सबसे छोटे संतान थे। इनके दादा जी इन्हें प्यार से राज कपूर के नाम से पुकारते थे। श्री जायसवाल जब महज दस वर्ष की आयु के थे, तभी एक गंभीर बीमारी के कारण उनकी माता का निधन हो गया। ऐसे में उनका बचपन अपने मौसा मौसी के यहां मधेपुरा में गुजरा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा भी मधेपुरा में हुई। इनके बड़े भाई अवधेश प्रसाद जायसवाल कोल्ड फील्ड में झारखंड के हजारीबाग में कार्यरत थे। 1982 में श्री जायसवाल ने हजारीबाग में ही अपने भाई के पास रहकर झारखंड बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा पास की। फिर वे वापस अपने मौसा मौसी के घर मधेपुरा आ गए। 1982-84 में पार्वती साइंस कॉलेज मधेपुरा से कला संकाय में इंटर एवं 1984-87 में इसी कॉलेज से मनोविज्ञान से ही स्नातक की पढ़ाई भी इन्होंने पूरी की। आपातकाल के समय 1977 में इनके मौसा जी श्री सुरेंद्र प्रसाद जायसवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सिंघेश्वर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में श्री जायसवाल ने अपने मौसा जी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया और यहीं से इनके अंदर राजनीतिक संगठनकर्ता , सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में विकाश हुआ और समाजिक क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा जगी। इसके पश्चात मधेपुरा के साइंस कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य एवं पूर्व सांसद स्वर्गीय रवि प्रसाद यादव के जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में संसदीय चुनाव प्रचार के दौरान इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इंटर की पढ़ाई करने के दौरान 1984 में मधेपुरा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे कद्दावर नेता श्री शरद यादव से इनकी मुलाकात हुई। इनके सांगठनिक क्षमता को देखकर श्री शरद यादव ने 1995 में इन्हें कटिहार के जनता दल युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया । 2005 में इन्हें जनता दल (यु) का जिला सचिव भी बनाया गया। 2008 में जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया। वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से इनकी घनिष्ठता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके द्वारा वैश्य आयोग की मांग किए जाने के कारण ही 2010 में नीतीश सरकार के द्वारा व्यवसाई वैश्य आयोग का गठन किया गया। 2014 में नीतीश कुमार के द्वारा एनडीए को छोड़ने पर यह जदयू से अलग हो गए। इसी वर्ष मधेपुरा से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे पूर्व सांसद श्रीमती रेणु कुमारी सिंह के पति श्री विजय कुमार सिंह के संसदीय क्षेत्र का इन्हें चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया। इस दौरान इन्होंने सहरसा हवाई अड्डे पर नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का कोऑर्डिनेटर के रूप में संचालन किया। दुर्भाग्यवश विजय सिंह हार गए और श्री जायसवाल भाजपा में एक कार्यकर्ता के रूप में शिथिल हो गए। 2015 में इन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को ज्वाइन कर लिया और इन्हें इस पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ पूर्वोत्तर झारखंड का प्रभारी भी नियुक्त किया गया। 2017 में पूर्वोत्तर के राज्यों में पार्टी का विस्तार किया। उपेंद्र कुशवाहा के चल रहे आंदोलन शिक्षा पर हल्ला बोल कार्यक्रम का पूर्वोत्तर के राज्यों में सफल करवाया। 2019 में लोकसभा चुनाव से पूर्व उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए से अपना नाता तोड़ दिया जिसके फलस्वरूप पूर्व में उनकी गतिविधियों को देखते हुए वह राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से अलग होकर एनडीए के कार्यों में लगे रहे। 2019 में पूर्वोत्तर की बड़ी राजनीतिक पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी को इन्होंने ज्वाइन किया और पार्टी में इनके पूर्व के कार्यों को देखते हुए इन्हें बिहार झारखंड के लिए राष्ट्रीय सचिव सह राष्ट्रीय संयोजक की बड़ी जिममेदारी दी है।
अपने सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों की व्यस्तताओं के बीच यह अपने परिवार के लिए भी पर्याप्त समय निकालने का पूरा प्रयास करते हैं। श्री जायसवाल के परिवार में इनकी धर्मपत्नी श्रीमती आलोचना देवी और एक पुत्री डॉक्टर रूपम जयसवाल(दरभंगा डेन्टल मेडिकल काॅलेज) एवं एक पुत्र शुभम कुमार (दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत) हैं।
Comments
Post a Comment