प्रस्तावना
" बरारी विधानसभा के शख़्सियत " पुस्तक लिखने में सहयोग की अपील ...
अस्सी के दशक में काढ़ागोला घाट का मार्केट कभी तत्कालीन कटिहार से ज्यादा संपन्न और समृद्ध था। अपने वर्तमान स्थिति से लगभग पंद्रह किलोमीटर विस्थापित हो कर आज काढ़ागोला अपने अतीत की जीर्ण शिर्ण परछाई मात्र रह गया है। वक्त ने वक्त के दिए ज़ख्मों को कुछ हद्द तक भर दिया है लेकिन अपने गौरवशाली अतीत को याद करते ही बहुत सारे बुजुर्गों की आंखे आज भी डबडबा जाती है। यह अलग बात है कि काढ़ागोला दार्जिलिंग रोड आज भी बिहार में बरारी को एक ख़ास पहचान देता है, लेकिन वास्तव में बरारी बहुत छोटा शहर है। इसके बावजूद यहाँ के ग्रामीण परिवेश से कई राजनीतिज्ञ, शिक्षा और साहित्य के महारथी, व्यापार के शहंशाह, समाजसेवी, डाक्टर और रंगकर्मी और प्रसाशनिक पदाधिकारियों आदि ने सफ़लता के उच्च कोटि का मुकाम स्थापित किया है। कितना अजीब लगता है ना पूरी दुनियाँ के बारे में सोशल मीडिया पर लंबी बहस में मशगूल बरारी वासी अपनी हीं धरती के योद्धाओं के संघर्ष और सफ़लता की अनोखी मिशाल से काफी अनजान हैं। बरारी की विरासत और शख़्सियत की तलाश अपने मिट्टी की उस सुनहरे खुशबू की तलाश है, जिसने यदा-कदा हमें गौरवान्वित होने का सुनहरा अवसर प्रदान किया। जिंदगी की खूबसूरती संघर्ष से प्राप्त होने वाली उस अद्भुत परिणाम में है, जिससे मानवजाति चुनौतियों को ठेंगा दिखा कर बोलती है, हम दुनियाँ के सबसे विवेकशील और कर्मशील प्राणी हैं जिसे हर प्रकार की चुनौतियों का सामना कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में महारत हासिल है। मैं बरारी के ऐसे हीं महारथियों की तलाश में अपनी एक पुस्तक लिखना चाहता हूँ - " बरारी के शख़्सियत "
मैं जानता हूँ, यह अत्यंत परिश्रम का कार्य है और इसके लिये हमें बरारी के अतीत का गहन पड़ताल करना होगा लेकिन ईश्वर और परम पिता परमेश्वर की कृपा और अपने शुभचिंतकों के सहयोग से मुझे पुरा विश्वास है कि हमलोग ऐसा कर पाने जरूर सफल होंगे। यह बरारी की धरती पर कर्म और संघर्ष के बल पर सफ़लता की गाथा लिखने वाले वर्तमान में जीवित लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। मुझे पूरी उम्मीद है आपलोग ऐसे जीवित लोगों का नाम हमें जरूर सुझायेंगे और ऐसे शख्सियतों का भी हमें निश्चित रूप से सहयोग प्राप्त होगा .....
बिपिन कुमार चौधरी (लेखक, कवि एवं शिक्षक)
जितेंद्र कुमार (रिपोर्टर, दैनिक भास्कर)
Comments
Post a Comment