14. बालमुकुंद टिबड़ेवाल

सेमापुर बाजार के दिग्गज व्यवसायी स्वर्गीय द्वारका प्रसाद टिबड़ेवाल के दत्तक पुत्र बालमुकुंद टिबड़ेवाल समाज सेवा संबंधी गतिविधियों के कारण अपनी खास पहचान रखते हैं। 1995 से लगातार बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन सेमापुर शाखा के मंत्री एवं गंगा समग्र उत्तर बिहार के नवगछिया से मनिहारी तक के जिला सह-संयोजक श्री टिबड़ेवाल का जन्म 1 जनवरी 1960 को भागलपुर जिला के शाहकुंड प्रखंड के पचरुखी में एक जमींदार परिवार में हुआ था। इनके जैविक माता का नाम स्वर्गीय सुमिंत्रा देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय हीरालाल जी रामूका है। इनकी माता स्वर्गीय सुमिंत्रा देवी चार बहनों में सबसे बड़ी थी। अतः अपने माता पिता को इन्होंने अपनी पहली संतान बालमुकुंद टिबड़ेवाल उपहार स्वरूप भेंट कर दिया था, जिससे बुढ़ापे में उनका यथोचित सेवा और देख रेख हो सके। दरअसल इनके माता-पिता स्वर्गीय सीता देवी और स्वर्गीय द्वारका प्रसाद टिबड़ेवाल के यह एक मात्र पुत्र हैं। बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन पटना के आजीवन सदस्य एवं संरक्षक, बिहार मारवाड़ी सम्मेलन शिक्षा समिति के आजीवन सदस्य और अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के आजीवन सदस्य के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले श्री टिबड़ेवाल धार्मिक अनुष्ठानों, मंदिर निर्माण और सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन में बड़े दानदाता के रूप में समाज में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा आदर्श मध्य विद्यालय सेमापुर से हुई। 1977 में जे. एन. सी. उच्च विद्यालय सेमापुर से प्रथम श्रेणी से मैट्रिक पास करने के पश्चात इन्होंने कॉमर्स संकाय से 1979 में डी. एस. कॉलेज कटिहार से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण किया। 1979-81  में डी. एस. कॉलेज में कॉमर्स से स्नातक में प्रवेश लेने के बावजूद पारिवारिक कारणों से यह फाइनल परीक्षा नहीं दे पाए।  श्री टिबड़ेवाल बचपन से एक मेधावी छात्र थे और उन्हें 1972 में राष्ट्रीय ग्रामीण छात्रवृत्ति के लिए भी चुना गया था लेकिन पढ़ाई के लिए घर से चार वर्षों तक दूर रहने के शर्त के कारण माता पिता के कहने पर इन्होंने यह छात्रवृत्ति छोड़ दी। 2007 से 2015 तक लगातार 8 वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सेमापुर के नगर अध्यक्ष रहे श्री टिबड़ेवाल ने सभी स्थानीय समस्याओं (जैसे नियमित बिजली आपूर्ति हेतु आंदोलन, व्यवसायियों के लिए सुविधाजनक रैक प्वाइंट की व्यवस्था, ट्रेन में बोगियों की संख्या को बढ़ाएं जाने हेतु आंदोलन, भ्रष्टाचार और चोरी के खिलाफ आंदोलन आदि) में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। इतना ही नहीं, गरीब बच्चों के लिए कोचिंग की व्यवस्था करवाने हेतु भी इन्होंने समय-समय पर महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। 1974 में जेपी आंदोलन के समय जे. एन. सी.उच्च विद्यालय सेमापुर से निकलने वाली एक जुलूस में भी इन्होंने भाग लिया था। जेपी आंदोलन के भूमिगत कार्यकर्ता के रूप में इनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही थी। 2018 में इन्हें गंगा समग्र के बैनर तले मनिहारी और काढ़ागोला घाट में गंगा आरती का सफल आयोजन कराने का भी सौभाग्य प्राप्त है।

महर्षि मेंही दास को अपना आदर्श मानने वाले श्री टिबड़ेवाल का स्थानीय थाना प्रभारी, मुखिया, सरपंच और विधायकों के द्वारा हमेशा खास सम्मान किया जाता रहा है। अपने सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों में इन्हें हमेशा अपनी धर्मपत्नी कुसुम देवी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहा है। इनकी तीन लड़कियां प्रिया सुल्तानिया, निम्मी बंसल और निकिता जिंदल हैं और एकमात्र लड़का विकास टिबड़ेवाल चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप स्थानीय व्यवसायियों का सहयोग करते हैं।

इन्होंने अपने जीवन दर्शन की भावना को कुछ इस अंदाज में व्यक्त किया है -

मारना हो किसी को मार दो एहसान से,

क्या मिलेगा अगर मार दोगे जान से,

जान का मारा दुश्मन बनेगा जान का,

सर उठा सकता नहीं मारा हुआ अहसान का...

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