18. भागवत प्रसाद यादव

भागवत प्रसाद यादव जन समस्याओं, पिछड़ों, गरीबों, दलितों, मजदूरों और किसानों की आवाज बुलंद करने और उनके हक की लड़ाई के लिए लगातार संघर्ष करने वाले एक ऐसे योद्धा हैं, जिन्हें समाज सेवा की कीमत कई बार जेल जाकर चुकाना पड़ा है। जेपी आंदोलन के लिए गठित त्रीस्तरीय समिति के सदस्य श्री यादव को आपातकाल के समय मीसाबंदी (आंतरिक सुरक्षा अधिनियम) के तहत 18 माह के लिए विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर में डाल दिया गया था। इनके करीबी मित्र कृष्ण कुमार चौधरी के अलावे जगबंधु अधिकारी, पूर्व सांसद युवराज सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री राम प्रकाश महतो के भाई शिव प्रकाश महतो आदि को भी इनके साथ मीसाबंदी के तहत जेल में डाल दिया गया था। इसी जेल में इन्हें मीसाबंदी के तहत गिरफ्तार बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव एवं पंडित रामानंद तिवारी के संपर्क में भी आने का मौका मिला था। दरसअल चार भाइयों में सबसे छोटे श्री यादव का जन्म एक क्रांतिकारी परिवार में 1 जनवरी 1942 को रोनिया गांव में हुआ था। इनके दरवाजे पर नियमित रूप से भागवत कथा का आयोजन होता था। दरवाजे पर भागवत कथा कराने के लिए आने वाले बाबा ने ही इनका नाम भागवत रखा था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय यशोदा देवी है। इनके पिता जी का नाम स्वर्गीय तारणी प्रसाद यादव है। 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस के  मुंबई अधिवेशन में महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा की गई। इससे प्रेरित होकर इनके पिता अपने दोनों भाइयों विष्णु देव प्रसाद यादव एवं यमुना प्रसाद यादव के साथ आंदोलन में कूद पड़े। इस दौरान रोनीया से गुजरने वाले ट्रेन पटरी को उखाड़े जाने के कारण श्री यादव, उनके दोनों भाइयों और गेना लाल चौधरी सहित चौदह लोगों को लगभग पांच वर्षों के लिए ब्रिटिश सरकार ने कारागार में डाल दिया था।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय रोनिया में हुई। इसके बाद इन्होंने आदर्श मध्य विद्यालय बरारी में अपना नामांकन करवाया। 1959 में जागेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास किया। 1962 में इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित डीएस कॉलेज से आर्ट्स विषय में इंटर की परीक्षा पास किया। 1968 में इन्होंने अर्थशास्त्र विषय से डीएस कॉलेज कटिहार से ही स्नातक की डिग्री भी प्राप्त किया। अपने कॉलेज लाइफ के दौरान इनका संपर्क पूर्व मंत्री बिहार सरकार कि स्वर्गीय जग बंधु अधिकारी से तब हुआ, जब श्री अधिकारी कटिहार से वार्ड कमिश्नर का चुनाव लड़ रहे थे। श्री अधिकारी ने श्री यादव को जनसंघ पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शाखा से जोड़ा। बरारी के तत्कालीन जनसंघ के प्रखंड अध्यक्ष स्वर्गीय विश्वनाथ भगत की अनुशंसा पर 1967 में जनसंघ के दीपक छाप चुनाव चिह्न से इन्हें पहली बार बरारी विधानसभा का चुनाव लड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। उस समय विधानसभा के अधिकांश उम्मीदवार साइकिल और पदयात्रा के द्वारा जनसंपर्क करते थे। इनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के वासुदेव प्रसाद सिंह से था। इस समय कांग्रेस का चुनाव चिन्ह दो बैलों का जोड़ा था। कांग्रेस के चुनाव चिन्ह के संबंध में उस समय आम लोगों के बीच एक नारा बहुत ही लोकप्रिय था - "दोनों बैल लड़ाकू है, एक चोर एक डाकू है!" हालांकि श्री यादव को इस चुनाव में सफलता प्राप्त नहीं हुई और कांग्रेस  उम्मीदवार वासुदेव सिंह से यह चुनाव 2500 वोटों के अंतर से हार गए। अगले चुनाव में आर्थिक असमर्थता के कारण इन्होंने चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई तो जनसंघ ने 1972 में इनकी जगह अधिवक्ता जीवनेश्वर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया। एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में श्री यादव के द्वारा जनसंघ के उम्मीदवार का भरपूर सहयोग किया गया लेकिन जिनेश्वर सिंह भी 5000 वोटों से चुनाव हार गए। 1974 में संपूर्ण बिहार में छात्र आंदोलन प्रारंभ हो गया। श्री यादव ने इस आंदोलन में भी काफी सक्रिय रूप से भाग लिया। 25 जून 1975 को श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल की घोषणा हुई और 26 जून 1975 को रात एक बजे इन्हें अपने घर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इन्हें लगभग 18 माह के लिए मीसाबंदी के रूप में स्पेशल सेंट्रल जेल भागलपुर में डाल दिया गया। 1977 में विधानसभा चुनाव के दौरान जनसंघ पार्टी द्वारा बरारी विधानसभा से उम्मीदवार के रूप में एकमात्र भागवत प्रसाद यादव का अनुशंसा किया गया। उस समय पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम द्वारा  इंद्रा गांधी से अलग होकर गठित सीएफडी पार्टी (Congress for democracy) से गठबंधन था। श्री जगजीवन राम की अनुशंसा पर श्री यादव की जगह गठबंधन ने वासुदेव सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया। श्री यादव की लोकप्रियता और उनके सहयोग से श्री सिंह चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल हुए और बाद में उन्हें बिहार का शिक्षा मंत्री भी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद 1984 में आखरी बार श्री यादव को भाजपा की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने का अवसर प्राप्त हुआ लेकिन दुर्भाग्य से इस बार भी यह चुनाव जीतने में असफल रहे। कांग्रेस के उम्मीदवार एवं पूर्व मंत्री करुणेश्वर सिंह को इस चुनाव में सफलता प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद समाज सेवा और आम लोगों के हित में श्री यादव लगातार सक्रिय रहे और संघर्ष करते रहे। सकरेली में श्री यादव ने कुर्सेला स्टेट रघुवंश प्रसाद सिंह का 70 एकड़ जमीन अपने मित्र पूर्व सरपंच कृष्ण देव महतो के साथ मिलकर जिलाधिकारी की अनुशंसा पर हरिजन समुदाय के गरीब लोगों के बीच बटवा दिया। इतना ही नहीं अयोध्या नाथ पाठक (पूर्व अाई. जी. मध्यप्रदेश) की 25 एकड़ जमीन भी गरीब लोगों के बीच बंटवाने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1971 में भयानक सुखाड़ के समय श्री यादव के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल कलेक्टर (तभी कटिहार पूर्णिया जिला का ही हिस्सा था) से मिलने उनके कार्यालय गए। उस समय पूर्णिया के जिला पदाधिकारी समलिंगदो साहब थे, जो बाद में चुनाव आयुक्त भी बने। शिष्टमंडल द्वारा सुखाड़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री बंटवाने का अनुरोध किये जाने पर समलिंगदो साहब नाराज होकर संपूर्ण पूर्णिया वासियों को मुफ्तखोर बोल दिया। इससे श्री यादव को इतना गुस्सा आया कि इन्होंने समलिंगदो साहब पर हाथ छोड़ दिया। इसके बाद श्री यादव को गिरफ्तार कर लगभग ढाई महीने के लिए पूर्णिया जेल भेज दिया गया था।

श्री मन्नालाल साह हरिजन उच्च विद्यालय के स्थापना में भी श्री यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। दरअसल एक रात यह अपने मित्र अयोध्या साह के यहां सोए हुए थे। रात में इन्हें एक सपना आया कि इनके द्वारा गरीब बच्चों की सुविधा के लिए एक उच्च विद्यालय की स्थापना की गई है। फिर क्या था आंख खुलते ही इन्होंने यह बात अपने मित्र अयोध्या साह को बताया। अयोध्या साह (विज्ञान स्नातक) एक विद्वान व्यक्ति थे। उन्होंने तत्काल आसपास के दस पन्द्रह बच्चों को बिठाकर गया भगत के गोला में पढ़ाना प्रारंभ कर दिया। इसके बाद श्री यादव के द्वारा विद्यालय निर्माण के लिए जमीन की तलाश प्रारंभ हो गई और इन्होंने कुछ ग्रामीणों की मदद से चमक लाल झा को जमीन दान करने के लिए तैयार कर लिया। अगले दिन बिहार सरकार के राज्यपाल के नाम से जमीन रजिस्ट्री करने हेतु सभी कागजात भी तैयार कर लिए गए लेकिन रजिस्टार द्वारा हस्ताक्षर नहीं हो पाया। इसके बाद एकाएक चमक लाल झा जमीन दान करने से मुकर गए। दरअसल विद्यालय में हरिजन नाम जोड़ना उन्हें बिल्कुल भी नागवार गुजर रहा था। श्री यादव हरिजन नाम से कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं थे और वह जमीन भी श्री झा का ही विद्यालय के लिए चाहते थे। बाद में श्री मन्ना लाल साह के द्वारा पांच एकड़ जमीन श्री झा को रजिस्ट्री की गई और इसके बदले में श्री झा के द्वारा विद्यालय निर्माण हेतु पांच एकड़ जमीन दान में दिया गया। इस प्रकार श्री मन्नालाल साह हरिजन उच्च विद्यालय के लिए श्री यादव के प्रयास से जमीन प्राप्त किया जा सका। मन्ना लाल साह के पुत्र भोला साह (चार्टर्ड एकाउंटेंट) स्विट्जरलैंड के एक कंपनी में कार्यरत थे और उन्हीं के प्रयास से स्वीटजरलैंड की एक ट्रस्ट फाउंडेशन लाइव फॉर ऑल के द्वारा श्री मन्नालाल साह हरिजन उच्च विद्यालय के निर्माण हेतु राशि उपलब्ध कराई गई।

1979 में अपने क्रांतिकारी मित्र नक्षत्र मालाकार के सहयोग से इन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता सूर्य देव नारायण सिन्हा के आधिपत्य से भगवती मंदिर कॉलेज बरारी को मुक्त करा कर स्नातक तक इसका सरकारीकरण कराया। श्री यादव एक अच्छे लेखक भी हैं। 17 जून 1973 को दिनमान सप्ताहिक पत्रिका में जन संघ के सिद्धांत और विचार से संबंधित आलेख को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था। श्री यादव 1979 से 1992 तक भगवती मंदिर महाविद्यालय बरारी के प्रबंधन समिति के सचिव भी रहे। अपने पांच दशक के राजनीतिक सक्रियता और समाज सेवा के कार्य करने के दौरान इन्हें कई कद्दावर नेताओं के संपर्क में आने का अवसर प्राप्त हुआ। वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमत्री सुशील मोदी, स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र, नित्यानंद राय, नंदकिशोर यादव आदि इनमें प्रमुख हैं। इस दौरान यह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री लालू यादव एवं श्री कर्पूरी ठाकुर के अत्यंत करीबी रहे। अपने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में श्री यादव को उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गायत्री देवी (सेवानिवृत्त शिक्षिका) का भी भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ। इनके तीन पुत्र मुकेश कुमार (शिक्षक), राजेश कुमार (किसान) एवं रवीश कुमार (समाजसेवी और किसान) एवं इकलौती पुत्री रश्मि भारती (शिक्षिका) भी इन्हीं के नक्शे कदम पर हमेशा समाजसेवा और आमलोगों की सहायता के लिए समर्पित रहते हैं।बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि बिहार के लोकप्रिय नेता पप्पू यादव इनके नाती हैं। दरअसल पप्पू यादव इनके फुफेरा भाई स्वर्गीय कामेश्वर यादव (गोरगमा, मनसाही) के चार लड़कियों में दूसरी लड़की श्रीमती शांति देवी के पुत्र हैं। यही कारण है कि जब पप्पू यादव की पत्नी श्रीमती रंजीता रंजन ने बरारी विधानसभा से चुनाव लड़ा था तो वह श्री यादव के आवास पर ही रहती थी।

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