25. कारुनेश्वर सिंह
अपने संपर्क में आने वाले लोगों का हर संभव मदद करने वाले, जनहित से संबंधित अपने काम और व्यवहार से बरारी की जनता के दिलों में राज करने वाले पूर्व राज्य मंत्री करुनेश्वर सिंह (ग्रामीण विकास विभाग स्वतंत्र प्रभार) बरारी विधानसभा के सभी वर्गों विशेषकर गरीबों, किसानों, दलितों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। इनका जन्म 8 जनवरी 1944 को एक संपन्न किसान परिवार में बल्थि महेशपुर, कुर्सेला में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती रामपड़ी देवी है। कुर्सेला में स्थित रामपड़ी कॉलेज की भूमि दाता इनकी माता ही है। इनके पिता जी का नाम योगेश्वर प्रसाद सिंह है। इनके पिताजी एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें 1932 में बरारी कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त था।श्री सिंह की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय बलथी महेशपुर में हुई। 1960 में कुर्सेला स्थित अयोध्या प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया में दाखिला लिया। आगे चलकर इन्होंने डीएस कॉलेज कटिहार में भी पढ़ाई किया। 1967 में माइनिंग इंस्टिट्यूट ऑफ कोडरमा से चार वर्षीय माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त किया। 1969 में बिहार कोल कारपोरेशन लिमिटेड, धनबाद में माइंस सेफ्टी ऑफिसर के रूप में अपना पहला जॉब प्रारंभ किया। माइनिंग से संबंधी कार्यों के कारण इन्हें 1000 फीट नीचे काम करने के लिए जाना होता था। इसी दौरान एक बार दुर्घटना हो जाने के कारण इनके माता-पिता ने इन्हें 1971 में घर वापस बुला लिया।
1972 में विनोबा भावे के समकालीन और सर्वोदय आश्रम कुर्सेला के संस्थापक बैजनाथ चौधरी के संपर्क में आने से इनका राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में रुचि प्रारंभ हुआ। 1973 में केदार पांडे के सरकार में राज्य मंत्री दिनेश कुमार सिंह के संपर्क में आए और इन्हें बरारी प्रखंड के यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। तत्कालीन जिला अध्यक्ष सीताराम चमरिया और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सतनारायण विश्वास के साथ उन्होंने संगठन को मजबूती प्रदान करने एवं छात्र आंदोलन और जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया।
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