27. रवीश किशोर
अपने जमाने के जाने-माने पत्रकार एवं कवि रतन किशोर के ज्येष्ठ पुत्र, बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में उप सचिव के रूप में कार्यरत रविश किशोर ने 2000 में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के 42 वीं बैच की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने क्षेत्र के लोगों को गौरवान्वित किया है। इनका जन्म 10 जनवरी 1971 को एक सामान्य परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती गीता रानी है। इनके पिताजी स्वर्गीय रतन किशोर एक पत्रकार और समाज सेवी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे। इनका प्रारंभिक शिक्षा आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार से हुई। 1984 में झक्सु नारायण उच्च विद्यालय सेमापुर से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। 1986 में इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित महाविद्यालय डीएस कॉलेज से साइंस विषय से इंटर की परीक्षा पास किया। 1991 में पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इन्होंने बॉटनी ऑनर्स की डिग्री प्राप्त किया। 1993 में इसी महाविद्यालय से इन्होंने बॉटनी से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया। 1995 में पटना विश्वविद्यालय से B.Ed का कोर्स पूरा किया और 1999 में बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर शिक्षक बनने में सफल रहे। रूपोली के एक सुदूर देहाती इलाके में स्थित मध्य विद्यालय में इन्होंने एक शिक्षक के रूप में कुछ दिनों तक बच्चों को भी पढ़ाया।
बीपीएससी द्वारा 2000 में आयोजित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर 3 अक्टूबर 2000 को इन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने में सफलता प्राप्त हुई। 2000-02 के बीच इन्होंने भोजपुर में प्रशिक्षु समाहर्ता के रूप में अपना सेवा दिया। 2002-05 के बीच नवगछिया में कार्यपालक दंडाधिकारी के रूप में अपना योगदान दिया। इस दौरान इन्हें गोपालपुर और इस्लामपुर प्रखंड के प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं सीईओ के रूप में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करना पड़ा। 2005-07 में जमुई जिला के लक्ष्मीपुर प्रखंड का इन्हें प्रखंड विकास पदाधिकारी बनाया गया। 2007-10 के बीच इन्होंने मधुबनी जिला के आंध्राठाढ़ी प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सीईओ के दायित्वों का निर्वहन किया। 2010-14 के बीच उप समाहर्ता के रूप में बेगूसराय जिला में यह कार्यरत रहे। जून 2014 से जुलाई 2015 के बीच एक बार पुनः मधुबनी जिला के आंध्राअठारी में अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित हुए। इसके बाद कुछ दिनों तक भागलपुर में वरीय उप समाहर्ता के रूप में भी अपने दायित्वों का निर्वहन किया। 2016 से बिहार राज्य के स्वास्थ्य समिति में उप सचिव के रूप के पद पर पटना में पदस्थापित हैं।
20 वर्षों से ज्यादा के अपने प्रशासनिक सेवा के दौरान इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कनिय कर्मचारियों का अभाव, समय से संचिका उपलब्ध नहीं हो पाना, प्रशासनिक जड़ता एवं कर्मचारियों में जनता की समस्याओं के समाधान हेतु उत्साह और कार्य में समर्पण का अभाव आदि के बावजूद इन्होंने अपने विवेक और सूझबूझ से जनता की समस्याओं के न्याय संगत समाधान करने का यथासंभव प्रयास किया है। अपने कार्य के प्रति इनके समर्पण भावना का ही यह परिणाम है कि इन्हें कई प्रकार के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। जनप्रतिनिधियों एवं कनीय कर्मचारियों के साथ इनका दोस्ताना व्यवहार और वरीय अधिकारियों से मधुर संबंध ने इन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनकी धर्मपत्नी श्रीमती कनक बाला भी बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के पद पर पिछले कई वर्षों से पटना में पदस्थापित हैं। इनका इकलौता पुत्र आयुष कुमार भी एक मेधावी छात्र है और आगे चलकर अपने माता पिता की तरह प्रशासनिक सेवा में जाना चाहता है।
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