31. शिक्षक वीरेंद्र सिंह
सेवानिवृत्त शिक्षक सरदार विजय सिंह का जेष्ठ पुत्र सरदार वीरेंद्र सिंह ने एक प्रधानाध्यापक, प्रखंड साधन सेवी, संकुल समन्वयक एवं शिक्षक के रूप में अपने पारदर्शी कार्यप्रणाली और कर्मठता की बदौलत शिक्षा जगत में अपना विशिष्ट पहचान बनाया है। 2017 में कटिहार के जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित श्री सिंह का जन्म 10 जनवरी 1973 को लक्ष्मीपुर में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती आशा कौर है। इनके परिवार के लोग इन्हें प्यार से बिंटू पुकारा करते हैं। अपने चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर आने वाले श्री सिंह बचपन से एक मेधावी छात्र थे। 1987 में जागेश्वर उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के पश्चात इन्होंने 1989 में भगवती मंदिर कॉलेज से साइंस विषय से इंटर की डिग्री प्राप्त किया। कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से 1993 में इन्होंने फिजिक्स ऑनर्स किया। इसके बाद इन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के साथ पिताजी के केला के खेती में सहयोग करना प्रारंभ कर दिया। 1999 में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा में उत्तीर्ण कर 20 जून 2005 को शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय, रामगंज संसारपुर खगड़िया में बीटी का कोर्स करने चले गए। इसके बाद इन्होंने 25 सितंबर 2001 को एक शिक्षक के रूप में मध्य विद्यालय, हृदय नगर, बसंतपुर सुपौल में अपनी सेवा प्रारंभ किया। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के दौरान इन्हें अपने बचपन के मित्र एवं वर्तमान में शिक्षक कुन्दन जी का भरपुर सहयोग प्राप्त हुआ। 9 जनवरी 2004 को मध्य विद्यालय बनेली पट्टी बसंतपुर सुपौल में इनका स्थानांतरण हो गया। 1 अगस्त 2007 को अंतर जिला स्थानांतरण के दौरान इनका अपने गृह जिला कटिहार में वापसी हो पाया। इसके पश्चात आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार में इन्होंने 29 अगस्त 2007 से एक शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन प्रारंभ किया। 2009-12 के बीच इन्हें उत्क्रमित मध्य विद्यालय बारी नगर संकुल का संकुल समन्वयक नियुक्त किया गया। 2009-11 में इन्होंने दूरस्थ शिक्षा माध्यम से इंद्रा गांधी नेशनल ओपेन युनिवर्सिटी से बीएड का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। 2012 में एक बार पुनः इन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी गई और विज्ञान शिक्षक के रूप में प्रखंड संसाधन सेवी की जिम्मेदारियों का 18 दिसंबर 2016 तक सफलतापूर्वक निर्वहन किया। 19 दिसंबर 2016 को पुनः इन्हें प्रोन्नति प्राप्त हुई और उत्क्रमित मध्य विद्यालय भैंसदिरा में स्नातक विज्ञान शिक्षक सह प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में पदस्थापित हुए। अगले ही वर्ष इन्हें कटिहार जिला के तत्कालीन जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्रा के द्वारा बेहतर सेवा के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रकार के विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रशिक्षक के रूप में वीरेंद्र कुमार बेहतर सेवा के लिए सम्मानित होते रहे हैं। एनसीईआरटी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निष्ठा के लिए राज्य स्तरीय साधनसवी के रूप में भी कटिहार जिला के लिए इनका चयन हुआ है। कोढ़ा प्रखंड में 600 से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर इन्होंने शिक्षकों के कौशल विकास और उन्मुखीकरण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया है। शिक्षकों का विज्ञान शिक्षक के रूप में शिक्षक उन्मुखीकरण कार्यक्रम में भी इन्होंने जिला का प्रतिनिधित्व किया है। 2019 में बिहार सरकार द्वारा मगध विश्वविद्यालय के सौजन्य से आयोजित फोल्ड स्कोप कार्यशाला में शामिल होने का सौभाग्य भी प्राप्त है। गरीब बच्चों की शिक्षा के प्रति चिंतित श्री सिंह अपने सहकर्मियों और सभी शिक्षकों को लगातार शिक्षा दान के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इनकी धर्मपत्नी डॉक्टर मीनू सोढ़ी भी वर्तमान मेंभारत सेवक समाज महा विद्यालय सुपौल में अतिथि सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके पूर्व श्रीमती सोढ़ी गुरु तेग बहादुर एकेडमी लक्ष्मीपुर के प्राचार्य के रूप में अपनी कार्यशैली और समर्पण के कारण अभिभावकों के बीच अपना विशिष्ट पहचान बना चुकी है। 2017 में भारत सेवक समाज महाविद्यालय सुपौल के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ संजीव कुमार के सानिध्य में कटिहार जिला के मखाना खेती की पारिस्थितिकी और पैथोलॉजी एवं कीट नियंत्रण विषय पर शोध पत्र लिखने वाली श्री सोढ़ी भी लगातार शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर करने के लिए प्रयासरत रहती है। श्री सिंह की दो पुत्रियां परमिश सोढ़ी (वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में अध्ययनरत) और (प्रभुजोत सोढ़ी गुरु तेग बहादुर एकेडमी लक्ष्मीपुर में अध्ययनरत) हैं। इनका इकलौता पुत्र प्रथम दीप सिंह है।
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