32. शिक्षक नवीन चौधरी

अनिल सिंह हत्याकांड के पश्चात हुए ऐतिहासिक आंदोलन के नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले शिक्षक नवीन कुमार चौधरी आज भी अपने सामाजिक सरोकारों से संबंधी गतिविधियों के कारण युवा वर्ग में अपनी गहरी पैठ रखते है। इनका जन्म 1 मार्च 1978 को एक संपन्न परिवार में जरलही में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती उषा जायसवाल एवं पिता का नाम राजकुमार चौधरी है। दुर्भाग्यवश जब यह बहुत कम आयु के थे तो इनकी सारी पुश्तैनी जमीन गंगा कटाव के भेंट चढ गई। इस प्रकार बचपन के दिन इन्हें अचानक काफी तंगी में गुजारना को मजबूर होना पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय जरलाही ही में संपन्न हुई। गंगा की कटाव से पीड़ित होकर इनका परिवार बरारी प्रखंड मुख्यालय के समीप बस गया। इसके बाद आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार से इन्होंने अपना आगे का पढ़ाई किया और जगेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से 1993 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। कटिहार के प्रतिष्ठित की के बी झा महाविद्यालय से इन्होंने साइंस विषय से इंटर की पढ़ाई किया। इसी दौरान इनकी मित्रता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सेमापुर इकाई के नगर मंत्री जितेंद्र चौधरी से हुई और उन्होंने 1995 में इन्हें संगठन से जोड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में इन्होंने संगठन के सभी जिम्मेदारियों जैसे निशुल्क कोचिंग आदि में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान मनोज जयसवाल, शिव कुमार श्रीवास्तव, रितेश चौधरी, धर्मेंद्र कुमार, कमल किशोर गांधी आदि इनके करीबी सहयोगी थे। 2006 में ही इन्होंने भगवती मंदिर कॉलेज की व्यवस्था में सुधार लाने एवं आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक पैमाने पर आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके फलस्वरूप इस कॉलेज में काफी सुधार हुआ। इसके पश्चात 2006 में शिक्षक नियोजन में धांधली के विरुद्ध भी इन्होंने जमकर आवाज उठाया। उनके आंदोलन का ही असर था कि कई पंचायतों में शिक्षक नियोजन प्रक्रिया की पुनः समीक्षा हुई और नए सिरे से शिक्षकों का नियोजन किया गया। 2008 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बरारी इकाई के उपाध्यक्ष अनिल सिंह की हत्या के पश्चात नवीन चौधरी के नेतृत्व में ही एक ऐतिहासिक आंदोलन हुआ था। जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर के भी कई नेताओं तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान,  उपेंद्र कुशवाहा, कृषि मंत्री प्रेम कुमार लालू यादव आदि बरारी पहुंचकर स्वर्गीय अनिल सिंह की विधवा से मिलकर न सिर्फ उन्हें आर्थिक सहयोग दिया बल्कि मुआवजे के रूप में उन्हें शिक्षिका की नौकरी भी प्राप्त हो पाई। इस आंदोलन की व्यापकता का असर इतना था कि राष्ट्रीय स्तर की मीडिया के द्वारा भी इस आंदोलन का जबरदस्त कवरेज किया गया था। इस आंदोलन में नवीन चौधरी को अपने साथियों जयप्रकाश यादव, मुकेश चौधरी, उमाशंकर चौधरी, अखिलेश सिंह, कुंदन मंडल, चंदन मंडल, आदि के साथ दो दिनों तक जेल में भी गुजारना पड़ा था। 209-12 के बीच इनके द्वारा गैर सरकारी संस्था बाल महिला कल्याण विभाग कटिहार के लिए लिंक वर्कर के रूप में एचआईवी एड्स के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया गया था। 2013 में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात नवीन चौधरी एक शिक्षक के रूप में मध्य विद्यालय कचना डगरूआ पूर्णिया में अपनी सेवा दे रहे हैं। 13 दिसंबर 2013 को इनका विवाह प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती दीपिका कुमारी से हो गई। इनके दो बच्चे हैं - नैना चौधरी और आध्या चौधरी। अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद यह आज भी समाज के रचनात्मक कार्यों में अपनी यथासंभव भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।

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