33. प्रभात कुमार सिंह
कुर्सेला बाजार से महज थोड़ी दूरी पर, राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सुतारा मेंही मिशन स्कूल के संस्थापक निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्राप्त करने के लिए लालायित छात्र-छात्राओं को एक बेहतरीन शैक्षणिक संस्थान उपलब्ध करवाया है। पांच एकड़ से भी ज्यादा में फैले, सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाओं जैसे डिजिटल कलास रूम, साइंस लैबोरेट्री, कंप्यूटर लैब, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, पोस्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए कैंपस में ही कैंटीन की व्यवस्था, खेलने के लिए बड़ा सा खेल का मैदान, उच्च योग्यताधारी समर्पित कुशल शिक्षक/शिक्षकाएं और बिल्कुल ही भय मुक्त शैक्षणिक माहौल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। दरअसल अपने छात्र जीवन में एक हिंदी माध्यम विद्यालय से पढ़े होने के कारण श्री सिंह को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा और जब इन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम में मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में जॉइनिंग लिया तो वहां भी तमाम काबिलियत होने के बावजूद सिर्फ स्पोकन इंग्लिश कमजोर होने के कारण ऑफिस में कलीग्स और सीनियर्स के द्वारा दोयम दर्जे के व्यवहार किए जाने से इन्होंने मन ही मन ठान लिया था कि जब भी इन्हें मौका मिलेगा यह अपने क्षेत्र के बच्चों के स्वर्णिम भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा उपलब्ध करवाने वाले एक बड़े शैक्षणिक संस्थान की स्थापना जरूर करेंगे।
अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्वर्गीय सुरेश्वर प्रसाद सिंह के तीन बच्चों में सबसे छोटे प्रभात कुमार सिंह का जन्म 5 जनवरी 1960 को बल्थी महेशपुर में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती तारा देवी है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय बल्थी महेशपुर एवं मध्य विद्यालय नवाबगंज में हुई। 1975 में इन्होंने अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास किया। 1970 में इन्होंने चंद्रधारी मिथिला साइंस महाविद्यालय दरभंगा से साइंस विषय से इंटर की परीक्षा पास किया। 1982 में इन्होंने भागलपुर कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग भागलपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त किया। अपने छात्र जीवन में इन्हें अपने पिताजी और अंग्रेजी के विद्वान शिक्षक स्वर्गीय सुरेश्वर प्रसाद सिंह के अलावे नागेश्वर चौधरी और महादेव यादव का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। मध्य विद्यालय नवाबगंज में प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद सिंह इन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करते रहें। अयोध्या प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक उग्र मोहन झा का भी इन्हें विशेष स्नेह प्राप्त था। इनके बचपन के सबसे करीबी मित्र रतन कुमार साह थे, जो बाद में झारखंड में पी डब्लयू डी विभाग में वरीय अभियंता के रूप में पदस्थापित हुए।
5 नवंबर 1984 को इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परीक्षा में उत्तीर्ण होकर हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी में मार्केटिंग में ऑपरेशन ऑफिसर के रूप में बॉम्बे में जॉइनिंग किया। सफल होने वाले चालीस छात्रों में सात छात्र बिहार से थे। बिहारी छात्रों की कर्मठता और लग्नशीलता से उच्च अधिकारी इतने प्रभावित थे कि इन सातों छात्रों को कंपनी के चेयरमैन ने शैंपेन का बोतल देकर अपने साथ सेलिब्रेशन के लिए आमंत्रित किया। उस समय कंपनी के लिए एकाउंटिंग का कार्य का निष्पादन करना एक जटिल समस्या थी और इस कार्य में बिहारी स्टाफ काफी दक्ष होते थे। इस कारण कंपनी के सीनियर द्वारा बिहारी स्टाफ को अपनी टीम में शामिल करने की एक होड़ सी मची होती थी। अपने बीस वर्षों के सेवाकाल में इन्हें कई बार प्रोन्नति भी प्राप्त हुई। 1990 में इन्हें पहली बार प्रोन्नति प्राप्त हुई और सीनियर मार्केटिंग ऑफिसर बने। 1995 में इन्हें सीनियर ऑपेरशन ऑफिसर, 2000 में उप प्रबंधक और 2002 में प्रबंधक बनाया गया। अपने बीस वर्षों के सेवाकाल के दौरान इन्हें भारत के विभिन्न शहरों कर्नाटका, महाराष्ट्र, गोवा, सोलापुर (रामगढ़), कोलकाता और बरौनी में अपनी सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ। 2004 में इन्होंने कंपनी से वीआरएस अर्थात ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया। 7 अप्रैल 2010 को इन्होंने कुर्सेला में सुतारा मेंही मिशन स्कूल की स्थापना की। अपने विद्यालय में इनकी प्राथमिकता होती है कि बच्चों को दक्षिण भारतीय विद्यालयों की भांति शैक्षणिक माहौल उपलब्ध करवाया जाए और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षक भयमुक्त माहौल में समर्पित होकर अपना कार्य करें। ग्रामीण परिवेश के बच्चों का व्यक्तित्व विकास और कम्युनिकेशन स्किल को निखार कर राष्ट्रीय फलक पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने के लिए प्रेरित करना इनके विद्यालय का मुख्य उद्देश्य होता है। शिक्षा का अलख जगाने के इस मुहिम में श्री सिंह को बिहार सरकार में पूर्व मंत्री करुणेश्वर सिंह, कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री संयोगिता सिंह, पूर्व सांसद नरेश यादव, विनोद राज झा, कृष्णानंद चौधरी और ओम सेठ का विशेष सहयोग प्राप्त होता रहा है।
श्री सिंह 13 मार्च 1986 को श्रीमती पूनम प्रभात से वैवाहिक बंधन में बंध गए। इनके सेवाकाल की सफलता एवं शैक्षणिक गतिविधियों में इनकी धर्मपत्नी का विशेष योगदान रहा है। इनकी तीन संतान हैं - डॉक्टर ऐश्वर्या सिंह (आईजीएमएस पटना में एमडी, रेडियोलॉजिस्ट, एवं सीनियर रेजिडेंट के रूप में पदस्थापित), अदिति सिंह (यूएस में Kent state university से पीएचडी की पढ़ाई कर रही है और असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है) और आदित्य सिंह (भुनेश्वर के कलिंग महाविद्यालय में लॉ का छात्र) हैं।
Comments
Post a Comment