36. ब्रह्मानंद साह

मोहनाचांदपुर के मुखिया ब्रह्मानंद साह अत्यंत ही शांत एवं मिलनसार प्रवृत्ति के सज्जन व्यक्ति होने के बावजूद एक ऐसे पंचायत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, जो अक्सर ही आपराधिक गतिविधियों के कारण चर्चा में बना रहता है। गंगा कटाव की त्रासदी से पीड़ित इनका बचपन काफी अभाव और आर्थिक संकट के बीच गुजरता है। इनका जन्म 20 अगस्त 1952 को भवानीपुर में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय सुदामा देवी है। इनके पिताजी का नाम स्वर्गीय मोहनलाल सा है जिन्हें भवानीपुर पंचायत का सरपंच रहने का सौभाग्य प्राप्त था। ईश्वर की कृपा से इनका जन्म एक अत्यंत संपन्न परिवार में हुआ था। इनके पिताजी भवानीपुर बाजार में किराना और कपड़ा के थोक व्यापारी थे। उस समय कटिहार आज की तरह कोई शहर नहीं बल्कि एक सामान्य कस्बा था। साहिबगंज, धुलियान, मुर्शिदाबाद, कहलगांव आदि से भवानीपुर और जरलाही के व्यापारी सामान लाया करते थे। जब श्री साह की आयु महज सत वर्ष की थी तो इनका पुश्तैनी मकान और बीस एकड़ जमीन 1959-60 में गंगा के गर्भ में समा गया और इनका संपूर्ण परिवार विस्थापित होकर बेलिया में किसी प्रकार गुजर-बसर करने लगा। मध्य विद्यालय भवानीपुर से इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा भी प्रारंभ हुई लेकिन एक बार फिर गंगा के कहर के कारण 1969 में बेलिया स्थित इनका आवास कटाव का शिकार हो गया और इनके परिवार को लगभग एक वर्ष तक बांध पर शरण लेना पड़ा। 1970 में सरकार द्वारा इनके परिवार को सोलह डिसमिल जमीन आवंटित कर कुंडी गांव में बसाया गया। 1970 में ही इन्होंने हैहय क्षत्रिय उच्च विद्यालय जोतराम राय भवानीपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास किया। इसके बाद इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित डी.एस. कॉलेज में नामांकन तो करवाया लेकिन पारिवारिक मजबूरियों और आर्थिक विपन्नता के कारण पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। 1973 में सुशीला देवी से इनका विवाह हो गया। इनकी धर्मपत्नी के बड़े भाई करुणेश्वर प्रसाद साह फारबिसगंज कॉलेज फारबिसगंज में डेमोंस्ट्रेटर इन फिजिक्स के पद पर कार्यरत थे। श्री साह का पढ़ाई के प्रति लगाव और पढ़ने की ललक को देखते हुए इन्होंने इन्हें फारबिसगंज बुला लिया और मंडल लॉज में इनके रहने की व्यवस्था कर दी। फारबिसगंज कॉलेज फारबिसगंज के कॉमर्स के हेड ऑफ डिपार्टमेंट सीएचएल लहरी के सानिध्य में एक बार फिर से इनका पढ़ाई प्रारंभ करवाया और 1975 में या इंटर की परीक्षा पास करने में सफल हुए। 

1975 में इंटर की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात श्री साह गृह रक्षा वाहिनी में नौकरी प्राप्त करने में सफल हुए। गृह रक्षक के रूप में अपने 3 वर्षों के कार्यकाल के दौरान इन्होंने अपने गांव के लोगों का प्रखंड और अन्य कार्यालय संबंधी कार्यों जैसे जाति आवास आय बनवाना, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना, वृद्धा पेंशन आदि में लोगों का सहयोग करने लगे और अपने गांव के लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए। 1985 में श्री साह तत्कालीन विधायक मंसूर आलम के संपर्क में आए और फूड फॉर वर्क योजना के अंतर्गत अपने गांव में बहुत सारे कच्ची सड़कों का निर्माण करवाया। 1987 में आने वाले भयंकर बाढ़ के दौरान बाढ़ पीड़ित लोगों के बीच रिलीफ बंटवाने और नाव की व्यवस्था करवाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनका इलाका हमेशा से एक बाढ़ पीड़ित इलाका रहा था जहां प्रतिवर्ष बाढ़ आना सामान्य बात है। 1987 से हर वर्ष बाढ़ के दौरान लोगों को सरकारी राहत सामग्री पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहने लगी और लोग इन्हें प्यार से मुखिया जी के नाम से संबोधित करने लगे। यही कारण है कि 2001 में जब 22 वर्षों के बाद पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव हुआ तो लोगों के आग्रह पर इन्हें मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ना पड़ा और यह चुनाव जीतने में भी सफल रहे। इस समय गांव के बच्चों के पढ़ाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। 2003 में इन्होंने सोनाखाल और मोहनाडीह में लोक शिक्षण केंद्र की स्थापना किया। आज यही लोक शिक्षण केंद्र प्राथमिक विद्यालय सोनाखाल और प्राथमिक विद्यालय मोहनाडीह के रूप में स्थित है। गांव के लोगों को बाढ़ की त्रासदी से आंशिक राहत देने के उद्देश्य से इन्होंने अपने निजी फंड से कुंडी नदी के किनारे कटिंग बांध का मरम्मत करवाया।  2006 और 2011 में मुखिया का पद महिला आरक्षित होने के कारण या चुनाव नहीं लड़ पाए लेकिन 2016 में पुनः सामान्य पुरुष का सीट होने पर इन्हें लोगों ने मुखिया के पद से प्रतिष्ठित किया। दूसरी बार मुखिया बनते ही बाढ़ राहत शिविर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आगमन होता है और स्थानीय विधायक के आग्रह एवं गांव वालों की मांग पर मुख्यमंत्री जी मंच से ही मोहना चांदपुर की कुंडी नदी पर पुल निर्माण की घोषणा कर देते हैं। गौरतलब है कि इस पुल के निर्माण हेतु श्री सा ह कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों एवं उच्च पदाधिकारियों से आग्रह और पत्राचार करते रहे थे। 2018 में इनके ही प्रयास से पंडित दीनदयाल विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत तीव्र गति से पंचायत के सभी गांव तक बिजली पहुंच पाया। इस दौरान इन्हें 400 से ज्यादा पुल की ढूलाई अपने निजी नाम से करना पड़ा। मुखिया रहते हुए पंचायत को आवंटित सभी फंड कि समुचित उपयोग एवं योजनाओं के बेहतर संचालन का प्रशंसा प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा भी किया जाता रहा है। शादी श्राद्ध में गरीब लोगों का खुलकर सहयोग करना, सभी प्रकार के धार्मिक सामाजिक कार्यों में तन मन धन से सहयोग करना श्री सा ह की आदत में शुमार है। 1990 से 2001 के बीच इन्हें अपने पैक्स का तीन बार चेयरमैन बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। कटिहार डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में भी इनके कार्यों की काफी प्रशंसा की गई है।

अपनी राजनीतिक और सामाजिक जीवन में श्री साह को सभी स्थानीय विधायकों मंसुर आलम, करुणेश्वर सिंह, प्रेमनाथ जायसवाल, विभाष चंद्र चौधरी, नीरज कुमार और स्थानीय सांसद तारिक अनवर, दुलाल चंद्र गोस्वामी का सहयोग मिलता रहा है। कटिहार के विधान पार्षद अशोक अग्रवाल की भी यह काफी करीबी रहे हैं। सीमांचल गांधी के नाम से मशहूर मोहम्मद तस्लीमुद्दीन, बिहार सरकार के मंत्री बिनोद सिंह और नरपतगंज विधानसभा के पूर्व विधायक जनार्दन यादव ने भी इनका यथासंभव सहयोग और मार्गदर्शन किया है। संघर्ष को जीवन का ध्येय मानने वाले श्री साह चुनौतियों का डटकर सामना करना ही जीवन की सफलता का कुंजी मानते हैं। इनका इकलौता पुत्र संजीव आंनद एक व्यवसाई हैं। इनकी दो पुत्रियां हैं - बेबी कुमारी और गुड्डी कुमारी।

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