37. रंजीत जायसवाल

बीसवीं शताब्दी के अस्सी के दशक में गंगा नदी के कटाव के कारण विस्थापित रेलवे के चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी जवाहर प्रसाद जायसवाल के तीसरी संतान के रूप में महज साढ़े छह माह तक माता श्रीमती परीणा देवी के गर्भ में रहने के पश्चात पंद्रह नवंबर 1979 को जन्म लेने वाले होनहार शख्स रंजीत जायसवाल उर्फ़ लालू के बारे में एक साधु ने आशीर्वाद देते हुए कहा था कि "जा बेटा मिट्टी का शेर बनेगा तू"।जवाहर नवोदय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले और जवाहर नवोदय विद्यालय के विधि व्यवस्था की देखरेख के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित ऑल इंडिया एसोसिएशन आईना के सक्रिय रिप्रेजेंटेटिव, चेंबर ऑफ कॉमर्स कटिहार के कार्यकारिणी के निर्विरोध आमंत्रित सदस्य, जयसवाल स्वर्गीय सेवा मंच कटिहार के संस्थापक सह जिला अध्यक्ष, बिहार प्रदेश जयसवाल सर्ववर्गीय युवा महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्णिया प्रमंडल प्रभारी, लायंस क्लब कटिहार के सदस्य, कटिहार जिला के फुटबॉल कमेटी में उपाध्यक्ष, बिहार व्यापारी तंबाकू एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश सचिव, जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष रंजीत जयसवाल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

श्री जायसवाल की प्रारंभिक शिक्षा बाल भारती मध्य विद्यालय में हुई। यह बचपन से एक मेधावी छात्र थे और जवाहर नवोदय विद्यालय का प्रवेश परीक्षा ***** में उत्तीर्ण करने में सफल रहे। जवाहर नवोदय विद्यालय काेलासी में इन्होंने कक्षा छह से कक्षा दसवीं तक अपने वर्ग में ग्रेड - ए प्राप्त किया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री जायसवाल पढ़ाई के अलावा खेलकूद, भाषण प्रतियोगिता, गीत संगीत, गायन वादन और अभिनय में भी विशेष रूचि रखते थे। कक्षा सातवीं में नेशनल बुक वीक के दौरान स्टोरी राइटिंग में इन्हें बेस्ट स्टोरी लिखने के लिए पुरस्कृत किया गया। कक्षा आठवीं में 20 नवंबर 1990 को नेशनल बुक विक के दौरान इन्हें मोमेंटो से सम्मानित किया गया। कक्षा नवम में 29 सितंबर 1992 को हिन्दी सप्ताह के दौरान "मैं कौन हूं ?" नाटक में सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए भी इमेज पुरस्कृत किया गया। इसी कक्षा में 11 दिसंबर 1992 को बैडमिंटन चैंपियनशिप में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर इन्हें प्रवीणता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। कक्षा दसवीं में इंटर हाउस क्वीज के दौरान 16 अक्टूबर 1993 को यह द्वितीय पुरस्कार जीतने में सफल रहे। **** में इंडियन काउंसिल फॉर इंटरनेशनल एमिटी जयपुर में इन्हें सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ जिसमें प्रथम बार 24 नवंबर 1990 को 70% और द्वितीय बार 25 सितंबर 1991 को 72% अंक प्राप्त करने में सफल रहे। 1994 में इन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास किया। इसी बीचएक दुर्घटना में इनके मंझले भाई सुजीत कुमार की एक दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु हो जाने के कारण इन्हें नवोदय विद्यालय छोड़ना पड़ा। आगे चलकर सुर तुलसी कॉलेज से इन्होंने 1997 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण किया। इतना ही नहीं इन्होंने स्टेट ताइक्वांडो एसोसिएशन ऑफ बिहार से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। भारत स्काउट और गाइड एन एफ रेलवे कटिहार के तहत स्काऊ का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। संगीत में बचपन से रुचि रहने के कारण इलाहाबाद प्रयाग संगीत समिति से संगीत में सीनियर डिप्लोमा की डिग्री प्राप्त किया है। स्टेज पर गाना, माउथ ऑर्गेंस और बांसुरी बजाना एवं स्टेज एंकर की भूमिका निभाने में इन्हें विशेष आनंद प्राप्त होता है।

एक मेधावी छात्र और पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद पारिवारिक एवं व्यवसायिक जिम्मेदारियों के कारण इन्हें स्नातक के दूसरे खंड में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।पिता के रिटायरमेंट के पश्चात मिलने वाली आठ लाख रूपए और चल अचल संपत्ति को बैंक में मॉर्गेज कर दस लाख लोन उठाकर इन्होंने अपना व्यापार प्रारंभ किया। सबसे पहले **** में डाबर इंडिया लिमिटेड का एजेंसी लिया और धीरे धीरे निप्पो बैट्री, कॉलगेट पेस्ट, जॉनसन एंड जॉनसन, पारले बिस्किट आदि का एजेंसी भी प्राप्त करने में सफल रहे। अत्यंत मिलनसार और सरल स्वभाव के होने के कारण इन्हें अपने व्यापार में लगातार सफलता प्राप्त होती रही। इनके माता-पिता तारापीठ (रामपुरहाट) में स्थित गुरु पहाड़ी बाबा के शिष्य परमात्मानंद भिंडी महाराज से दीक्षित थे। इस कारण अक्सर इनका आश्रम में अपने माता-पिता के साथ वहां जाना होता था। ***** में एक साधु इन्हें गौर से देख रहे थे। श्री जायसवाल ने उस साधु का चरण धोकर, उन्हें पानी पिलाया। साधु ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा था कि "जा बेटा मिट्टी का शेर बनेगा तू..."।

19 फरवरी 2001 को इनका विवाह कटिहार के रामकुमार जायसवाल के द्वितीय पुत्र रूणा जयसवाल से हो गई। विवाह के कुछ ही दिनों बाद एक शादी समारोह में भागलपुर जाते समय सड़क हादसे के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए। इस समय इनकी धर्मपत्नी गर्भवती थी लेकिन ईश्वर ने सभी को सुरक्षित बचा लिया। यह देखकर सिलीगुड़ी के डॉक्टर भी अचंभित थे। अपने माता पिता का आशीर्वाद प्राप्त कर और माता के हाथ से टीका लगाने के बाद ही घर से निकलने वाले श्री जायसवाल जब आर्थिक रूप से थोड़ा सक्षम हुए तो यथासंभव जरूरतमंद लोगों के सहयोग और सेवा के लिए यह लालायित रहने लगे। अपने इसी सेवा भावना से प्रेरित होकर इनके द्वारा अपने मित्र अमित कुमार प्रवीण, रवि चौधरी आदि के सहयोग से जायसवाल सरवर यह सेवा मंच कटिहार की ***** में स्थापना किया गया। गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र और कंबल वितरण करना, आर्थिक मदद करना, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु मेडिकल कैंप का आयोजन करवाना आदि के माध्यम से लगातार लोगों की सेवा करने लगे। कई बार रात्रि में भयानक ठंड के बावजूद यह अपने कुछ मित्रों के साथ सड़क पर निकल जाते थे और ठंड में ठिठुरते लोगों को कंबल वितरण करते हुए भी देखे गये।

***** में श्री जायसवाल को रेवा स्मृति और अन्य के द्वारा आईना (ऑल इंडिया नेशनल एल्यूमिनी एसोसिएशन) का कोऑर्डिनेटर बनाया गया। यह संस्था नवोदय विद्यालय जाकर बच्चों से मिलकर उनकी परेशानियों के समाधान हेतु प्रिंसिपल से विचार विमर्श करना और नवोदय विद्यालय की बेहतरी के लिए अपने सुझाव देती है। इसके अलावा कैंसर पीड़ित लोगों के ईलाज में भी सहयोग करती है। ***** में इन्हें बिहार सिगरेट व्यापारी संघ का गठन हुआ जिसमें राजू प्रसाद गुप्ता को अध्यक्ष, देवेंद्र कुमार को उपाध्यक्ष और निर्मल तुलसियान को महासचिव, प्रशांत कुफ को कोषाध्यक्ष और श्री जायसवाल को सचिव पद पर नियुक्त किया गया। यह संस्था पान दुकानों और फुटकर व्यापारी के लिए सरकार से टैक्स कम करने और उनके हित के लिए लगातार संघर्ष करती रही है। इसी दौरान इनका संपर्क कटिहार के विधायक तारकिशोर प्रसाद से हो गया, जिनके द्वारा इनका नाम जिला फुटबॉल संघ के उपाध्यक्ष पद के लिए पर प्रस्तावित किया गया। ***** में इन्हें लायंस क्लब आप कटिहार का सदस्य बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। एक सक्रिय सदस्य के रूप में समाज के लोगों को डायबिटीज के प्रति जागरूक करना, प्राकृतिक आपदा में सेवा आदि कर्तव्यों का यह निष्ठापूर्वक निर्वाहन करने लगे। 22 अक्टूबर 2019 को बिहार प्रदेश जायसवाल सर्ववर्गीय युवा महासभा पटना के तत्कालीन प्रांतीय अध्यक्ष राकेश जयसवाल के द्वारा इन्हें बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया एवं पूर्णिया प्रमंडल का प्रभारी भी बनाया गया। इस दौरान जायसवाल समाज को मजबूत बनाने के लिए होली समारोह के अलावे कई महत्वपूर्ण कार्य इनके द्वारा किए गए।

हर क्षेत्र में इनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए भुवन अग्रवाल एवं विमल सिंह बेगानी के द्वारा नॉर्थ ईस्टर्न बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के कांड समिति किस सदस्य हेतु इनका नाम भेजा गया। इस प्रकार इन्हें निर्विरोध विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए कार्यकारिणी का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गांधीजी के 150 वीं पुण्यतिथि पर संगठन की प्रकाशित पत्रिका में इनका भी लेख प्रकाशित हुआ। इस पत्रिका का विमोचन केरल के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार के द्वारा किया गया। विमोचन कार्यक्रम में राज्यपाल महोदय के व्यक्तित्व परिचय को मंच पर प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी श्री जायसवाल को ही सौंपी गई थी।

**** में जनता दल यूनाइटेड के व्यवसायिक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष शिव अग्रवाल के द्वारा इन्हें पार्टी जॉइन करने का ऑफर दिया गया लेकिन राजनीति से दूर रहकर समाज सेवा करने की अपनी प्रबल इच्छा के कारण इन्होंने इंकार कर दिया। फिर एक दिन जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश कोषाध्यक्ष सह बिहार प्रदेश व्यवसायिक प्रकोष्ठ के संयोजक ललन सरार्फ के समझाने पर इन्होंने ना सिर्फ उन्हें अपना राजनीतिक गुरु बना लिया बल्कि अररिया के एक पार्टी कार्यक्रम में हजारों लोगों के सामने महानगर अध्यक्ष ( जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ,कटिहार) की जिम्मेदारी भी स्वीकार कर ली। इनकी पार्टी में आने से कार्यकर्ताओं में काफी खुशी का माहौल था और यह खुशी तब और ज्यादा बढ़ गई, जब जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार दुलाल चंद्र गोस्वामी सांसद चुनाव कटिहार से जीतने में सफल रहे। श्री गोस्वामी भी श्री जयसवाल का जदयू में आना अपने और अपनी पार्टी के लिए शुभ संकेत मानते हैं। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण और कटिहार संसदीय क्षेत्र में वैश्य समाज के वोटों की संख्या के मद्देनजर श्री जायसवाल को भविष्य के नेता के रूप में देखा जा रहा है। अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच अपनी पुत्री शगुन और पुत्र गर्व के लिए भी श्री जायसवाल समय निकालने का यथासंभव प्रयास करते हैं।

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