38. मनोज कुमार सिंह

अत्यंत गरीब परिवार से आने वाले मनोज कुमार सिंह 2017 और पुनः 2020 में जदयू (बरारी) के प्रखंड अध्यक्ष के रूप में मनोनीत होकर एकाएक बरारी विधानसभा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आ गये। 1 जनवरी 1979 को इनका जन्म एक अत्यंत साधारण सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में पिता स्वर्गीय छेदी प्रसाद सिंह और माता सुभद्रा देवी की चोथी संतान के रूप में हुआ। 1984 में इनके पिताजी की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जब इनकी आयु महज पांच वर्ष थी। ऐसे कठिन परिस्थितियों में इनकी माता ने गाय बकरी पोष कर इनका  लालन पालन किया। पारिवारिक जिम्मेारियों और आर्थिक समस्याओं के कारण बहुत ज्यादा पढ़ाई भी नहीं कर पाए लेकिन चाचा मेदनी प्रसाद मेहता की मदद से किसी प्रकार 1995 में हाई स्कूल प्रतापनगर, कदवा से इन्होंने मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण किया। इसके पहले 1990 में इन्हें मजदूरी करने पड़ोसी बच्ची मेहता के साथ शिमला भी जाना पड़ा। मैट्रिक पास करने के बाद एक बार फिर रोजी रोटी की तलाश में पड़ोसी लखन मृद्धा के साथ इन्हें दिल्ली जाना पड़ा। दिल्ली पहुंचकर शुरुवाती कुछ दिनों तक इन्हें कई रात भूखे भी गुजारना पड़ा। हालांकि बाद में इन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में हेल्पर की नौकरी मिल गई। इससे इनके आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ लेकिन एक बार फिर इन्हें परिस्थितियों के आगे मजबूर होकर दिसंबर 1997 में वापस अपने घर बरारी लौटना पड़ा और पुनः दाने दाने के लिए मोहताज हो गए।ऐसे में केला व्यपारियों का सहयोगी बन कर अपना जीवन यापन करने लगे। इसी बीच इनका विवाह मार्च 1998 में से गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर के प्रांगण में हो गई। 2004 में तात्कालीन मुखिया जनार्दन यादव के संपर्क में आकर इन्होंने समाजसेवा में दिलचस्पी लेना प्रारंभ कर दिया। गरीब लोगों के प्रखंड कार्यालय संबंधी समस्याओं का समाधान, 2005 में गांधी ग्राम में हनुमान मंदिर के निर्माण और प्राथमिक विद्यालय गांधी ग्राम से गंगा दार्जिलिंग रोड तक सड़क निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध कराने में इनकी सक्रिय भूमिका ने इन्हें अपने वार्ड के लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया और 2006 में निर्विरोध वार्ड दो का पंच बनने में सफलता प्राप्त हो पाई। वार्ड पंच रहते हुए इन्होंने अपने वार्ड के सभी विवादों को आपसी पंचायती से हल करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लोगों को बेवजह मुकदमेबाजी से बचाया। 2008 में अपनी माता के नाम पर गैर सरकारी संस्था सुभद्रा सेवा संस्थान का गठन कर घर-घर शौचालय निर्माण करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। 2011 में इनके लोकप्रियता के कारण इनकी धर्मपत्नी सुनीता देवी वार्ड सदस्य का चुनाव जीत कर उप मुखिया बनने में सफल रही। 2013 में जदयू के तत्कालीन प्रखंड अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह ने इन्हें एक कार्यकर्ता के रूप में जनता दल यूनाइटेड से जुड़ा और 2014 में इन्हें इनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर युवा प्रखंड अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 2015 में कुशवाहा समाज के राष्ट्रीय सचिव शिवपूजन सहाय ने इन्हें कुशवाहा समाज का सक्रिय सदस्य बनाया। 2016 में श्री सिंह स्वयं वार्ड सदस्य का चुनाव जीत कर उप मुखिया बनने में सफल रहे। उप मुखिया बन कर इन्होंने प्राथमिक विद्यालय गांधीग्राम से गंगा दार्जिलिंग रोड को सीधी जोड़ने वाले रोड का पंचायत समिति के बाइस लाख के फंड से निर्माण करवाया। सात निश्चय योजना एवं गली नली योजना का अपने पंचायत में सफलतापूर्वक शत प्रतिशत कार्यान्वयन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2017 में इन्हें जदयू का प्रखंड अध्यक्ष बनाया गया और तीन वर्ष पश्चात 2020 में भी यह दोबारा प्रखंड अध्यक्ष बनने में सफल रहे। 2016-17 में बरारी के वार्ड सदस्य संघ का अध्यक्ष बनने का भी इन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ। मद्द निषेध अभियान के तहत 21 जनवरी 2017 को, दहेज प्रथा उन्मूलन अभियान के तहत 21 जनवरी 2018 को और जल जीवन हरियाली अभियान के तहत 19 जनवरी 2020 को आयोजित होने वाली मानव श्रृंखला के आयोजन में इनकी काफी सक्रिय भूमिका रही है।

अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन में इन्हें स्थानीय विधायक विभाष चंद्र चौधरी, नीरज कुमार, जदयू के क्षेत्रीय प्रभारी कामाख्या नारायण सिंह, जदयू के जिला संगठन प्रभारी अशोक बादल, जदयू नेत्री एवं पूर्व मंत्री बिहार सरकार लेसी सिंह, पूर्णिया सांसद संतोष कुशवाहा, जदयू प्रदेश सचिव नवीन आर्या, जदयू के राष्ट्रीय सचिव आरसीपी सिंह, बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार आदि का सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। श्री सिंह की पांच पुत्रियां हैं - प्रिया कुमारी, प्रियंका कुमारी, कामना कुमारी, रोहिणी कुमारी, सिमरन कुमारी।

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