40. नरेश यादव (राज्य सभा सांसद)
पूर्व राज्यसभा सांसद, सर्वोदय आश्रम कुर्सेला के अध्यक्ष एवं 1932 में महात्मा गांधी के द्वारा स्थापित हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गांधीवादी नरेश यादव आज भी अपने क्षेत्र के गरीबों, दलितों, पिछड़ों और लाचार लोगों की सशक्त और बुलंद आवाज के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।इनका जन्म 11 जुलाई 1950 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय चंद्रावती देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद यादव है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय अयोध्यागंज तीनघरिया से हुई। 1966 में अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय से उच्च माध्यमिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात उन्होंने पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया से 1967 में बी. ए. प्रीवियस और 1968-70 में कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त किया। 1970-72 में भागलपुर विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया और इसी दौरान इवनिंग कॉलेज के माध्यम से भागलपुर विश्वविद्यालय से ही एल.एल.बी. की डिग्री भी प्राप्त किया। 1972-74 के सत्र में भागलपुर विश्वविद्यालय से इन्होंने बी.एड. का कोर्स पूरा किया। अपने छात्र जीवन में इन्हें अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक उग्र मोहन झा के द्वारा विशेष स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त होता था। इसके अलावा गणित एवं हिंदी और अंग्रेजी साहित्य के प्रकांड विद्वान जनार्दन मंडल, नरेंद्र सिंह, प्रभाकर झा, सुरेश्वर सिंह, स्काउट और भूगोल के शिक्षक मुक्तिनाथ सिंह, शरीर विज्ञान के शिक्षक गिरिधर झा आदि के भी श्री यादव प्रिय छात्रों में एक थे। आगे चलकर पूर्णिया कॉलेज, पूर्णिया के प्राचार्य मदनेश्वर मिश्र, दर्शन शाह महाविद्यालय के प्रोफ़ेसर डाक्टर परमानंद सिन्हा, डॉ मृत्युंजय मिश्रा, डॉ विष्णु देव चौधरी, डॉक्टर पृथ्वी चंद्र अग्रवाल, भागलपुर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ हरिद्वार सिंह आदि ने भी इनका भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन किया। छात्र जीवन में इनके करीबी मित्रों में घनश्याम यादव (एफसीआई के वित्तीय प्रबंधक), कटिहार के वर्तमान विधान पार्षद अशोक अग्रवाल के बड़े भाई विजय अग्रवाल, इंदु भूषण मंडल (रिटायर्ड जज सिविल कोर्ट, कटिहार), यमुना ठाकुर (प्रबन्धक, एसबीआई), रामधनी साह (रिटायर्ड जज सिविल कोर्ट, कटिहार), देवानंद साह (एफसीआइ प्रबंधक), अशोक चौधरी (रिटायर्ड सिविल अभियंता) आदि थे।
श्री यादव बचपन से अपने आसपास के लोगों के सहयोग एवं समाज की समस्या के समाधान हेतु तत्पर रहते थे। अप्रैल 1964 में अचानक तीनघरिया आग लग गई और इनके गांव का प्राइमरी स्कूल पूरी तरह जल गया। ऐसे में इन्होंने अपने प्रयास से माथे पर फुस और काश ढोकर एवं ग्रामीणों से बांस सहयोग के रूप में मांग कर विद्यालय का निर्माण करवाया और फिर से गांव के बच्चों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था को प्रारंभ करवाया। इसी वर्ष इन्होंने चरवा लोगों के लिए रात्रि पाठशाला का संचालन प्रारंभ किया। 28 फरवरी 1969 को श्री यादव का विवाह श्रीमती राजकुमारी देवी से हो गया और इसी वर्ष इन्हें राजगीर में होने वाले सर्वोदय सम्मेलन में कुर्सेला स्थित सर्वोदय आश्रम के संस्थापक भगवन स्वामी के साथ भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस सम्मेलन में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी दलाई लामा निर्मला देशपांडे एवं संत विनोवा भावे आदि महापुरुषों का आगमन हुआ था। इस सम्मेलन में श्री यादव संत विनोवा भावे से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने गांधी विचारधारा का अनुसरण करने एवं गांधी के बताए पद पर आजीवन चलने का निर्णय ले लिया। ***** में कुर्सेला में भूमि आंदोलन काफी उग्र हो गया। ऐसे में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीधर महादेवी जोशी, सामना पत्रिका के संपादक येदू नाथ थत्ते, जननायक कर्पूरी ठाकुर, एस एम जोशी आदि ने कुर्सेला के सर्वोदय आश्रम में सात दिवसीय कैंप का आयोजन किया। इस कैंप के दौरान एक व्यवस्थापक के रूप में श्री यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आगे चलकर इन्होंने एस एम जोशी से सक्रिय राजनीति में आने की अपनी इच्छा जताई। श्री जोशी ने इन्हें महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिला के मूल मरोड़ा स्थित बाबा आमटे के आश्रम में जाकर कुष्ठ रोगियों की सेवा एवं श्रमदान का आदेश दिया। श्री यादव ने उनकी आज्ञा मानते हुए अपने गांव के दिनेश साह के साथ अंतरराष्ट्रीय यूथ कैंप में छह माह तक सेवा प्रदान किया। वहां से वापस लौट कर 19 मार्च 1974 को जेपी आंदोलन में कूद पड़े। 21 मार्च 1974 को छात्र संघर्ष समिति के द्वारा कुर्सेला स्थित बड़ी दुर्गा मंदिर में बैठक कर इलाके के सभी युवाओं ने सर्वसम्मति से इन्हें अध्यक्ष बनाया। इस दौरान एक व्यापारी का चावल लदा तीन बैलगाड़ी इनके द्वारा पकड़ा गया। उस समय चावल का अंतर जिला व्यापार एक गैर कानूनी कार्य था। ऐसे में श्री यादव ने सभी चावल का स्थानीय बाजार में बिक्री कर, बिक्री से प्राप्त राशि व्यापारी को सौंप दिया। आंदोलन के दौरान आर्थिक परेशानी आने पर यह अपनी मित्र मंडली के साथ लोगों का जूता पालिश करने लगते थे। जून 1974 में छात्रों का एक विशाल जुलूस इनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा था। तभी रघुवंश बाबू के बगीचा एवं रेलवे लाइन के बीच मजिस्ट्रेट मंडल जी ने बीएसएफ जवानों के साथ इन्हें रोक दिया और जुलूस पर स्टैनगंज तान दिया। दरअसल पुलिस अधीक्षक को किसी ने यह गलत सूचना दी थी कि यह भी कुर्सेला स्थित पोस्ट ऑफिस को आज रात चलाने वाला है लेकिन तत्कालीन एडीएम साहब ने अपने विवेक और सूझबूझ से पांच सदस्यीय समिति को वार्ता के लिए आमंत्रित किया और एक भयावह अप्रिय घटना घटित होने से रह गया। बाद में वार्ता के बाद शांतिपूर्ण जुलूस निकालने की प्रशासन ने अनुमति प्रदान कर दी। 19 सितंबर 1974 को मीसाबंदी के तहत इनकी गिरफ्तारी हुई और इन्हें भागलपुर और हजारीबाग जेल में रखा गया। इस दौरान इन्हें जन नायक कर्पूरी ठाकुर, पंडित रामानंद ठाकुर, सच्चिदानंद सिंह, श्री कृष्ण सिंह आदि के संपर्क में आने का अवसर प्राप्त हुआ। 1978 में भयानक बाढ़ की त्रासदी के दौरान इनके द्वारा घास आंदोलन का शंखनाद किया गया। दरसअल बाढ़ के दौरान पालतू जानवरों के रेलगाड़ी से घास लाने वाले गरीब लोगों का कुछ आपराधिक प्रवृति के लोगों द्वारा पिटाई किये जाने से श्री यादव काफी चिंतित और दुखी थे। इनके खास आंदोलन के फलस्वरूप तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमर प्रताप सिंह के द्वारा दोषी लोगों को गिरफ्तार किया गया। युवा लोकदल के नेतृत्व में 1988 में प्रेस विधेयक का विरोध करने पर इन्हें नितीश कुमार, शिवानंद तिवारी, जयप्रकाश यादव, राजकुमार गुप्ता आदि के साथ तीन माह तक फुलवारीशरीफ जेल में रहना पड़ा। 29 सितंबर 1991 में इन्होंने किसानों की समस्याओं के समाधान, कोऑपरेटिव लोन की माफी एवं किसानों की जमीन अपराधियों के कब्जे से मुक्त कराने के उद्देश्य से बरारी के गांधी स्मृति भवन में बैठक कर किसान संघ का स्थापना किया। सर्वसम्मति से रघुवंश सिंह को अध्यक्ष श्री यादव को सचिव, विष्णु देव सिंह को उपाध्यक्ष, बैद्दनाथ भगत को मंत्री बनाया गया। इसके अलावा श्यामदेव श्यामल शिव कुमार भारती आदि इनके महत्वपूर्ण सहयोगी थे। इनके प्रयास से ही किसान संघ के द्वारा गांधीजी के आह्वान पर 1942 में हुए देशव्यापी भारत छोड़ो आंदोलन के स्थानीय शहीद लोगों का खोज प्रारंभ हुआ। जिसके फलस्वरूप 13 अगस्त 1942 को देवीपुर में अंग्रेजों की गोलीबारी में शहीद हुए लालजी मंडल, नटाय परिहार, रमचू यादव, धतुरी मोदी, जागेश्वर महलदार आदि की खोज हो सकी और 9 अगस्त 1993 को कटिहार के तत्कालीन जिलाधिकारी आर आर प्रसाद, पुलिस अधीक्षक मिश्रा जी एवं वरिष्ठ पत्रकार राजरतन कमल की गरिमामय उपस्थिति में देवीपुर में शहीद स्थल की स्थापना की गई। 13 अगस्त को प्रतिवर्ष यहां पर झंडोत्तोलन कर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया जाता है। दिसंबर 1993 में कुर्सेला के सर्वांगीण विकास हेतु कुर्सेला को अलग प्रखंड का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से संघर्ष समिति का गठन हुआ जिसमें श्री यादव को अध्यक्ष बनाकर संघर्ष के संचालन का दायित्व दिया गया।
जनवरी 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने इन्हें एक संदेश भिजवाया और पटना आकर मिलने बोला। इसके पश्चात इन्हें राज्यसभा के लिए निर्वाचित कर दिल्ली भेजा गया।राज्य सभा सांसद रहते हुए श्री यादव ने कुर्सेला में गांधी किसान स्वास्थ्य मेला का प्रतिवर्ष आयोजन किया जिसमें देशभर के कृषि विशेषज्ञ आकर लोगों को जागरूक करते थे। 1994 में तत्कालीन रेल मंत्री से सभी रेलगाड़ियों में आपातकालीन खिड़की की व्यवस्था करने का आग्रह किया। तत्कालीन रेल मंत्री रामविलास पासवान से कुर्सेला बिहारीगंज रेल लाइन के सर्वेक्षण का शिलान्यास करवाया। इस दौरान इन्हें 2004 और 2008 में महान गांधीवादी निर्मला देशपांडे और संसदीय दल के साथ पाकिस्तान दौरा करने का अवसर प्राप्त हुआ तो उन्होंने पाया कि बाघा बॉर्डर पर पाकिस्तान के कायदे आजम जिन्ना साहब की तस्वीर लगी हुई है लेकिन भारत के राष्ट्रपिता गांधी जी की तस्वीर नहीं लगी हुई है। ऐसे में इस मामले को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के संज्ञान में लाकर यथाशीघ्र तस्वीर लगवाने का आग्रह किया जिसके फलस्वरूप आगे चलकर यहां महात्मा गांधी की मूर्ति लगवाई गई। इसके अलावा इन्हें 1995 में इटली और 1996 में इंग्लैंड का भी दौरा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गरीब यात्रियों के लिए इन्होंने शताब्दी और राजधानी की भांति सुविधाओं से संपन्न कम भाड़ा वाले रेलगाड़ी चलाने के मामले को उठाया। आगे चलकर लालू यादव जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने गरीब रथ का संचालन प्रारंभ किया।श्री यादव 2000 से लगातार सर्वोदय आश्रम की सेवा में तल्लीन है और इनके प्रयास से हैं कुर्सेला स्थित सर्वोदय आश्रम को गांधी सर्किट से जोड़ा गया एवं भूकंप आधारित देश में पहला गांधी संग्रहालय का निर्माण सर्वोदय आश्रम में करवाया गया। 2020 में बिहार सरकार के पर्यटन विभाग से दो करोड़ बियालिस हजार की लागत से एक बहु-उपयोगी सभागार का निर्माण एवं सर्वोदय आश्रम का सौंदर्यीकरण का कार्य करवाया जा रहा है।
अपने पांच दशक के राजनीतिक सामाजिक क्रियाकलापों में श्री यादव को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री राम विकास पासवान, बिहार सरकार के सिंचाई मंत्री सच्चिदानंद सिंह, पीएचडी मंत्री गजेंद्र हिमांशु, सांसद युवराज सिंह, जननायक कर्पूरी ठाकुर आदि का भरपूर सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। इनका इकलौता पुत्र संतोष भारती एक किसान हैं। इनकी पुत्रवधु कंचन कुमारी (शिक्षिका) समाज के बच्चों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनकी दो पुत्रियां अनीता कुमारी और सुनीता कुमारी हैं।
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