41. उमेश सिंह
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक सदस्य एवं बरारी विधानसभा के अध्यक्ष, बरारी प्रखंड मत्स्यजीवी सहयोग समिति के मंत्री उमेश सिंह कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के लिए आंदोलन और मछुआरा समुदाय के लोगों के हक - हकूक़ के लिए लगातार संघर्ष करने के कारण सत्ता के गलियारों में एक क्रांतिकारी नेता की छवि रखते हैं। इनका जन्म 5 दिसंबर 1970 को काढ़ागोला के मिरकेल गांव में हुआ था। यह गांव 1999 में गंगा कोसी के कटाव की भेंट चढ़ गया। इनकी माता का नाम स्वर्गीय अहिल्या देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय छट्ठू प्रसाद सिंह है। इनके पिताजी राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। अपने छह भाई बहनों में पांचवें नंबर पर आने वाले श्री सिंह बचपन से एक मेधावी छात्र थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा मध्य विद्यालय काढ़ागोला में हुई। 1986 में इन्होंने जागेश्वर उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। 1986-88 में इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से इंटर किया। 1988-91 में इन्होंने रामबाग कॉलेज, पूर्णिया से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त किया। अपने छात्र जीवन में इन्हें जागेश्वर उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक खगेंद्र सिंह, हिंदी के शिक्षक अरुण वर्मा, रसायन विज्ञान के शिक्षक रामचंद्र सिंह, गणित के शिक्षक किशोर सिंह आदि का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इनके करीबी मित्रों में प्रमोद भगत (डीआरएम, असम), दिलीप झा (सरकारी कर्मचारी), मोहम्मद असलम (बैंक प्रबंधक), मोहम्मद मुस्ताक (सरकारी कर्मचारी), धर्मेंद्र कुमार (सरकारी कर्मचारी) आदि प्रमुख थे। श्री सिंह के पिताजी अपने अल्प वेतन में अपने सभी बच्चों के पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। यही कारण है कि अपने छात्र जीवन में इन्हें काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा और इन्होंने इसके समाधान के लिए इंटर से ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना प्रारंभ कर दिया।
श्री सिंह बचपन से ही सामाजिक कार्यों और अपने आसपास के लोगों की मदद में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। गंगा कोसी के कटाव पीड़ितों की गंभीर समस्या को देखते हुए, इसके समाधान एवं सरकारी मदद के लिए इन्होंने अपने कुछ मित्रों राजेन्द्र मंडल, उमेश साह आदि के साथ मिलकर 1992 में बाढ़ कटाव संघर्ष समिति बरारी का गठन किया। सभी लोगों ने सर्वसम्मति से इन्हें अध्यक्ष का दायित्व निर्वहन करने की जिम्मेदारी सौंपी। श्री सिंह कटाव पीड़ित लोगों के पुनर्वास एवं गंगा दियारा क्षेत्र में अपराधियों के आतंक पर अंकुश लगाने हेतु लगातार धरना प्रदर्शन एवं जुलूस निकालते रहे। इसके बावजूद भी जब प्रशासन के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो 2000 में श्री सिंह अपने कुछ साथियों के साथ प्रखंड मुख्यालय में भूख हड़ताल पर बैठ गए। पांच दिनों तक इनके द्वारा लगातार किए जाने वाले भूख हड़ताल के पश्चात तत्कालीन जिलधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोहर मरांडी ने इनकी मांगों को यथासंभव पूरा करने के आश्वासन के साथ इनका भूख हड़ताल तुड़वाया। इसके तुरंत बाद प्रशासन ने इनके सहयोग से कटाव पीड़ित लोगों के बीच उनके घर निर्माण हेतु पोल और टीन का वितरण किया। कुछ दिनों के पश्चात काढ़ागोला घाट और उचला में पूर्व में बिहार सरकार द्वारा जमींदारों की 56 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर 500 परिवारों का पुनर्वास करवाया गया। इसके बावजूद भी 1000 से ज्यादा परिवार अब भी अपने पुनर्वास की बाट जोह रहे थे। ऐसे में श्री सिंह को एक बार फिर से 2002 में प्रखंड मुख्यालय में चार दिनों तक हड़ताल पर बैठना पड़ा। इस दौरान इनके समर्थकों ने दस घंटे के लिए कटिहार बरौनी रेल खंड एवं सभी सड़क मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। ऐसे में तत्कालीन जिलाधिकारी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, पुलीस अधीक्षक उमेश सिंह, कटिहार अनुमंडल पदाधिकारी, तात्कालीन मनिहारी विधायक विश्वनाथ सिंह आदि ने बरारी प्रखंड मुख्यालय पहुंच कर यथाशीघ्र कटाव पीड़ितों के पुनर्वास का आश्वासन देते हुए इनका भूख हड़ताल समाप्त करवाया। 2004 में अपने शुभचिंतकों के आग्रह पर इन्होंने पहली बार बरारी प्रखंड मत्स्य जीवी सहयोग समिति के मंत्री पद के लिए चुनाव लड़ा और चुनाव जीतने में सफल रहे। मंत्री का चुनाव जीत कर इन्होंने बरारी प्रखंड में मौजूद सरकारी जलकरों को आपराधिक लोगों के कब्जे से मुक्त करवाने हेतु एक व्यापक आंदोलन का शंखनाद किया। जिसके फलस्वरूप सिंधिया धार जलकर, अड़ैया जलकर, कल्याणी जलकर, रूपनी जलकर आदि दर्जनों जलकरों को अपराधियों के चंगुल से मुक्त कराया जा सका। इनके कार्यों और कुशल व्यवहार के कारण 2009-12 में इन्हें एक बार पुनः मंत्री पद का चुनाव जीतने में सफलता प्राप्त हुई। इसके पहले इनकी लोकप्रियता और जनता से जुड़ाव के कारण इनकी धर्मपत्नी श्रीमती संजू सिंह को आम लोगों के आग्रह पर आंगनबाड़ी सेविका के पद से इस्तीफा दे कर पूर्वी बारीनगर से मुखिया का चुनाव लड़ना पड़ा, (जिसमें इनका चुनाव चिन्ह टेलीविजन छाप था) और जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने में भी सफल रही। इस दौरान इनका कार्यकाल इतना बेहतरीन रहा कि अगले दो चुनाव 2011 (डबल मोमबत्ती चुनाव चिन्ह से) और 2016 (ईंट भट्ठा का चिमनी चुनाव चिन्ह से) के पंचायत चुनाव में भी श्रीमती संजू सिंह मुखिया का चुनाव जीतने में कामयाब रही। इसी दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के द्वारा किसी भी प्रखंड में मौजूद मछुवारों के सभी स्वाबलंबी समिति को मान्यता दिए जाने के कारण संपूर्ण बिहार में मछवारा समुदाय के बीच अफरा तफरी मच गई। आगे चलकर 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस समस्या के समाधान हेतु किसी प्रखंड में मौजूद सभी स्वाबलंबी समितियों को मिलाकर एक तदर्थ समिति के गठन का प्रस्ताव पारित किया। 2012 में होने वाले चुनाव में इनके समिति सदस्यों की संख्या कम होने के कारण इन्हें पराजय झेलना पड़ा लेकिन 2017 में पुनः श्री सिंह मंत्री का चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके पहले 2010 में श्री सिंह ने बरारी विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पतंग छाप चुनाव चिन्ह से चुनाव लड़ा था लेकिन एक निर्दलीय उम्मीदवार होने के कारण, इन्हें कोई खास सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसी वर्ष इनके द्वारा पंचायत स्तरीय जन प्रतिनिधियों के द्वारा चुने जाने वाले विधान पार्षद का भी चुनाव लड़ा गया था।
2014 में श्री सिंह सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी के संपर्क में आए। मुकेश सहनी मल्लाह और निषाद समाज के लोगों को एससी अथवा एस टी कोटि के अंतर्गत आरक्षण देने हेतु लगातार आंदोलनरत थे, जिसमें श्री सिंह की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। चार नवंबर 2018 को गठित होने वाले विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक सदस्य में श्री सिंह भी एक महत्वपूर्ण नाम थे। श्री सिंह को बरारी विधानसभा अध्यक्ष मनोनीत किया गया। श्री सिंह ने भी बरारी विधानसभा के प्रत्येक पंचायत में पार्टी से लोगों को जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के पार्टी कार्यक्रमों का आयोजन और पार्टी की विचारधारा का लगातार प्रचार प्रसार करते रहे हैं। अपने पांच दशक के सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में इन्हें मनिहारी के पूर्व विधायक विश्वनाथ सिंह, बरारी के पूर्व विधायक मोहम्मद शकूर, पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर एवं वर्तमान विधान पार्षद अशोक अग्रवाल का विशेष सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा है। श्री सिंह के चार संतान हैं - प्रीतेश कुमार (बीटेक का छात्र), कुमारी शालिनी सिंह, अक्षेस आकाश और मंजेस मंजर।
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