43. के.एल. अग्रवाल

सत्यभामा नेत्रालय के संस्थापक, मधुबनी मेडिकल कॉलेज में आंख विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्रोफेसर, आंख सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ के एल अग्रवाल ने 45000 से ज्यादा लोगों के आंखों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नई जिंदगी प्रदान किया है। इनका जन्म 1 मार्च 1979 को बरारी के एक संपन्न व्यवसाई परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती सत्यभामा अग्रवाल एवं पिता का नाम भोलाराम अग्रवाल है। अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे कन्हैया अग्रवाल को उनके मित्र प्यार से केएल के नाम से पुकारते थे जो आज इनकी पहचान बन चुकी है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बरारी के निजी विद्यालय एल बेथल से प्रारंभ हुई। आगे चल कर इन्होंने आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार में अध्ययन किया। 1993 में इन्होंने जागेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया।अपने पढ़ाई के शुरुआती दिनों में श्री अग्रवाल पढ़ाई में बहुत अच्छे छात्र नहीं थे। इनके परिवार के लोग इन्हें पढ़ाना चाहते थे लेकिन पढ़ाई में कमजोर होने और अखिल भारतीय स्तर के प्रतियोगिता परीक्षा पास करने में असफल रहने  के कारण पारिवारिक व्यापार में सहयोग करने लगे। इसी बीच एक बार फिर से इनके मन में पढ़ाई करने की लालसा जगी और कुछ ही दिनों की कोचिंग के पश्चात इन्होंने कोचिंग और कंपटीशन की परीक्षाओं में बेहतर करना प्रारंभ कर दिया। 1999 में अखिल भारतीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा को उत्तीर्ण कर इन्होंने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज बेलगाम से 1999-2004 के सत्र में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त किया और अपने बैच के थ्रुआउट टॉपर रहे।

एमबीबीएस की परीक्षा पास करने के पश्चात इन्होंने 2004 - 05 जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल दिल्ली से इन्होंने इंट्रशिप किया।  इंटर्नशिप खत्म होने के पश्चात एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ में स्नातकोत्तर में इनका चयन हो गया। अगस्त 2005 के बाद हिंदू राव हॉस्पिटल दिल्ली में जूनियर रेसिडेंट के रूप में आठ माह तक कार्य किया।   इसके बाद इन्होंने अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात पीजीआई रोहतक हरियाणा में हड्डी रोग की पढ़ाई करने लगे। आगे चलकर इन्होंने इसे छोड़कर दरभंगा मेडिकल कॉलेज दरभंगा में स्नातकोत्तर एम.एस.(आई) में नामांकन ले लिया। दरभंगा मेडिकल कॉलेज में आंख विभाग के यूनिट हेड डॉ मनोज कुमार इनसे इतना प्रभावित हुए कि इन्हें तीन वर्षों के दौरान 300 से ज्यादा लोगों के आंखों के सर्जरी का अवसर प्रदान किया जबकि सामान्य तौर पर आंख के नए  प्रशिक्षु सर्जन को 10 से 20 सर्जरी का ही अवसर प्राप्त होता था। इस दौरान मुजफ्फरपुर के डॉक्टर एस पी सिंहा, दिशा आई हॉस्पिटल कोलकाता के डॉक्टर अयान मोहंता एवं डाक्टर मृणमोय दास का इन्हें विशेष स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा। इनके महाराष्ट्रीयन रूम पार्टनर डाक्टर विवेक वार्काड भी इन्हें काफी प्रोत्साहित किया करते थे। यहां से एम. एस. की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात 2009 में रेटीना के फेलोशिप हेतु अरविंद अाई हॉस्पिटल मदुरई में इनका चयन हो गया। रेटीना फेलोशिप पूरा करने के तुरंत बाद 2009 में इनका चयन सर रतन टाटा फाको फेलोशिप, शंकर नेत्रालय, चैन्नेई के लिए हो गया। यहां की फेलोशिप पूरा करने के पश्चात 2009-10 के दौरान नेपाल में इनका चयन मेची आई हॉस्पिटल वीरता मोड़ नेपाल में चीफ आई सर्जन के रूप में हो गया। इसी बीच इनके द्वारा एल. वी. प्रसाद इंस्टिट्यूट हैदराबाद में कुछ बेसिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया गया।

इसी बीच अरविंद पटेल एवं निरंजन जी से इनका संपर्क हुआ और लायंस क्लब कटिहार से जुड़ गए। लायंस क्लब कटिहार के सौजन्य से इन्होंने अपने जन्म स्थान काढ़ागोला में पहला सर्जिकल कैंप आयोजित किया और उस शिविर में बयासी लोगों के आंखों की सर्जरी इनके द्वारा की गई। इनके पिताजी भोला अग्रवाल एक आध्यात्मिक प्रवृत्ति के समाजसेवी व्यक्ति थे। अपने पिता के सुझाव पर इन्होंने 2010 में अपने जन्मस्थान काढ़ागोला में अपनी मां के नाम से सत्यभामा नेत्रालय के आंख के हॉस्पिटल का स्थापना कर अपना प्रैक्टिस प्रारंभ कर दिया और सिर्फ आठ माह में सोलह सौ से ज्यादा लोगों के आंखों का सर्जरी इनके द्वारा किया गया, जो बरारी जैसे छोटे स्थान के लिए एक बेमिसाल रिकॉर्ड है। इनकी लोकप्रियता का यह आलम था कि प्रखंड मुख्यालय स्थित इनके हॉस्पिटल में कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज आदि जिला के लोग भी अपनी आंख संबंधी समस्याओं के इलाज हेतु इनके अस्पताल में आने लगे। ऐसे में इनके छोटे भूभाग में स्थित हॉस्पिटल में जगह की कमी से बहुत सारी परेशानियां उत्पन्न होने लगी। फिर दोपहर तीन बजे के बाद बाहर से आए मरीजों को यातायात संसाधनों के अभाव में घर वापस लौटने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में कई बार श्री अग्रवाल को बाहर से आए मरीजों को अपने छोटे अस्पताल में रात गुजारने की व्यवस्था भी करनी पड़ती थी। इन्हीं कारणों से अपना हॉस्पिटल एनएच के पास गेड़ाबाड़ी और बाद में दूसरा शाखा कटिहार में शिफ्ट करने का निर्णय इनके द्वारा लिया गया।आज इनके गेड़ाबाड़ी और कटिहार स्थित आंख के हॉस्पिटल सत्यभामा नेत्रालय में ओपीडी सेवा के साथ-साथ द्वितीय और कुछ हद तक तृतीय स्तरीय आंख की बीमारियों के इलाज हेतु सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी सेवा में मायोपिया, हायपर मेटो पिया, प्रेस बायोपिया, आंख लाल होना, आंख में सूजन होना, नाखुना, आंखों में मांस बढ़ जाना, काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा), आंख छोटा बड़ा होना आदि का बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरे और तीसरे स्तर की सेवा में ओकिलोप्लास्टि, नवजात शिशु के आंखों का ऑपरेशन, जन्मजात मोतियाबिंद, नवजात शिशुओं के टेढ़ी आंख, बच्चों के आंखों के पलक उठाने का इलाज कम खर्च में आधुनिक तकनीकों के साथ किया जाता है। तीसरे स्तर की सेवाओं के लिए भी लगातार श्री अग्रवाल प्रयासरत रहे हैं और बहुत जल्द आंखों के कैंसर, रेटीना की सर्जरी, आंख बैंक और आंखों के ट्रांसप्लांटेशन आदि की सुविधा इनके द्वारा सत्यभामा नेत्रालय में उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। आंख बैंक और आंखों के ट्रांसप्लांटेशन हेतु भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के ट्रांसप्लांटेशन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलते ही यह सेवा कटिहार में प्रारंभ हो जाएगी।

गरीब लोगों के आंखों की समस्या के इलाज हेतु श्री अग्रवाल द्वारा समय-समय पर गैर सरकारी संस्थानों जैसे रोटरी क्लब के सौजन्य से सिवान, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, हाजीपुर आदि भंसाली ट्रस्ट अहमदाबाद के सौजन्य से बोधगया, लायंस क्लब कटिहार के सौजन्य से कटिहार के विभिन्न प्रखंडों में, रोटरी क्लब कटिहार के सौजन्य से भी कटिहार के विभिन्न प्रखंडों में 1000 से ज्यादा नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। इनके बेहतर कार्य को देखते हुए कटिहार के अत्यंत लोकप्रिय समाजसेवी अनिल चमरिया द्वारा इन्हें रेड क्रॉस सोसायटी एवं संजय कतरुके द्वारा रोटरी क्लब कटिहार से जोड़ा गया। एक नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में इन्होंने अब तक 300000 से ज्यादा लोगों के आंखों का जांच किया है, जिसमें हजारों की संख्या में गरीब लोगों का मुफ्त जांच और इलाज किया गया है। 45000 से ज्यादा लोगों का सर्जरी कर चुके हैं, जिसमें 20000 से ज्यादा गरीब लोगों का मुफ्त में सर्जरी किया गया है। इनकी सत्यभामा नेत्रालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अन्तर्गत आने वाली ईसीएचएस योजना, आयुष्मान भारत योजना आदि के अंतर्गत भी इलाज किया जाता है और सभी प्रकार के मेडिक्लेम एवं गरीबों के लिए मुफ्त सर्जरी के अलावा पैड सर्जरी का भी काम किया जाता है। श्री अग्रवाल एमबीबीएस में एडमिशन के पश्चात से ही लगातार अवार्ड और मेडल जीतते रहे हैं। इनके द्वारा 2012 में  बिहार ऑप्थोमोलॉजिकल सोसाइटी के लिए प्रस्तुत शोध पत्र के लिए डाक्टर मंगतू राम गोल्ड मेडल अवॉर्ड और सिंगापुर में प्रस्तुत एशियन ऑप्थोलामोजीकल सोसायटी पर शोधपत्र बेस्ट पेपर अप्रिशिएशन अवॉर्ड के अलावा कई लीडर डेवलपमेंट प्रोग्राम में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा बहुत सारे समाज सेवी संस्थाओं के द्वारा भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका है।श्री अग्रवाल ने अपने सत्यभामा नेत्रालय में अपने  पिता सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों,नामी गिरामी हस्तियों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराया है। इतना ही नहीं बहुत से नामचीन डाक्टर के परिवार के लोगों द्वारा भी इनसे आंख का इलाज करवाया जा चुका है। अमीर से अमीर और गरीब से गरीब लोगों को समान गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा बिना भेदभाव  उपलब्ध करवाया जाता है।

ऐसे तो एक संपन्न परिवार से होने के कारण श्री अग्रवाल को बहुत ज्यादा आर्थिक  समस्याओं का कभी सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि इन्हें अपने माता पिता के साथ साथ अपने सभी भाइयों का भी भरपूर सहयोग प्राप्त होता रहता था। आठ जुलाई 2010 में श्रीमती पियाशा अग्रवाल से वैवाहिक बंधन में बंधने वाले श्री अग्रवाल को अपनी धर्मपत्नी से भी भरपूर सहयोग प्राप्त होता रहा है। श्रीमती पियाशा अग्रवाल सत्यभामा नेत्रालय गेड़ाबाड़ी और कटिहार की अस्पताल प्रबंधक भी हैं। इनके दो पुत्र हैं - अक्षित अग्रवाल और आकर्ष अग्रवाल।

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