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Showing posts from March, 2020

44. डाक्टर प्रियंवदा

पटना एम्स में कुछ दिनों तक कार्यरत एवं वर्तमान में भारत की सर्वश्रेष्ठ पैथोलॉजी लाल पैथोलॉजी पटना की चीफ ऑफ लैब के पद पर कार्यरत डॉक्टर प्रियंवदा बरारी विधानसभा के लोगों के लिए महिला सशक्तिकरण की एक अद्भुत मिसाल हैं। बिशनपुर पंचायत के वर्तमान मुखिया परशुराम सिंह एवं पूर्व मुखिया श्रीमती सरस्वती देवी की इकलौती पुत्री डॉक्टर प्रियंवदा का जन्म 26 जनवरी 1982 को कटिहार में हुआ था। परिवार के लोग इन्हें प्यार से मुन्नी के नाम से पुकारते हैं। इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय हजारीबाग की प्रवेश परीक्षा 1993 में उत्तीर्ण कर इन्होंने छोटी आयु में ही कुछ अच्छा करने के संकेत दे दिए थे। 1997 में इस विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात इन्होंने पटना विमेंस कॉलेज पटना से 1999 में इंटर की परीक्षा लगभग 75% अंकों के साथ उत्तीर्ण किया। इसके पश्चात कुछ दिनों तक इनका पढ़ाई पारिवारिक कारणों से बाधित हुआ लेकिन 2003 में अखिल भारतीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर इन्होंने पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज धनबाद से 2007 में एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त किया। दरअसल बचपन में जब डॉक्टर इन की मां को देखने आती औ...

43. के.एल. अग्रवाल

सत्यभामा नेत्रालय के संस्थापक, मधुबनी मेडिकल कॉलेज में आंख विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सहायक प्रोफेसर, आंख सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ के एल अग्रवाल ने 45000 से ज्यादा लोगों के आंखों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नई जिंदगी प्रदान किया है। इनका जन्म 1 मार्च 1979 को बरारी के एक संपन्न व्यवसाई परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती सत्यभामा अग्रवाल एवं पिता का नाम भोलाराम अग्रवाल है। अपने पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे कन्हैया अग्रवाल को उनके मित्र प्यार से केएल के नाम से पुकारते थे जो आज इनकी पहचान बन चुकी है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा बरारी के निजी विद्यालय एल बेथल से प्रारंभ हुई। आगे चल कर इन्होंने आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार में अध्ययन किया। 1993 में इन्होंने जागेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया।अपने पढ़ाई के शुरुआती दिनों में श्री अग्रवाल पढ़ाई में बहुत अच्छे छात्र नहीं थे। इनके परिवार के लोग इन्हें पढ़ाना चाहते थे लेकिन पढ़ाई में कमजोर होने और अखिल भारतीय स्तर के प्रतियोगिता परीक्षा पास करने में असफल रहने  के कारण पारिवारिक व्यापार में सहयोग करने लगे। इसी बी...

शुभकामना संदेश

सर  कुछ मंत्री स्तरीय कद्दावर नेताओं का इस फॉर्मेट में शुभकामना संदेश लिखवा सकते हैं क्या लेकिन पच्चीस अप्रैल के पहले। अगर ख़ुद वो नहीं लिख सकते तो टेलीफोन पर बातचीत करवा दें। मैं लिख कर उन्हें व्हाट्स एप कर दूंगा और बाद में वो अपने लेटर पेड पर लिख कर, हस्ताक्षर कर हमें व्हाट्स एप और कुरियर कर देंगे ---------------------------------------------- महाशय,            अत्यंत हर्ष के साथ आपको सूचित करना है कि बहुत जल्द बरारी विधानसभा के शख्सियत पुस्तक का प्रकाशन होने जा रहा है। इस पुस्तक में आपसे लगभग दो सौ शब्दों में शुभकामनाएं अपेक्षित है... *शुभकामना संदेश में अपेक्षित सूचना* 👉🏻 आपका बरारी विधानसभा से जुड़ाव कब और कैसे हुआ। 👉🏻 पिछले कुछ वर्षों में आपने बरारी विधानसभा में क्या साकारात्मक बदलाव देखा है। 👉🏻 बरारी विधानसभा के विकास के लिए आपके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों का संक्षिप्त विवरण। 👉🏻 आपके नजरिए से बरारी विधानसभा के विकास के लिए कौन लोग विशेष रूप से सक्रिय हैं अथवा आप स्वयं किन लोगों को बरारी का शख्सियत मानते हैं। 👉🏻 बरारी की उन्नति के ...

42. परशुराम सिंह

बिशनपुर पंचायत के वर्तमान मुखिया परशुराम सिंह ने अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ का सचिव रहते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर एवं निखिल चौधरी के सहयोग से कटिहार में डाक अधीक्षक कार्यालय का सृजन कर संपूर्ण जिला वासियों को एक अद्भुत तोहफा प्रदान किया है। इनका जन्म 25 मार्च 1954 को धेनुआ गांव में हुआ था, जो 1964 में गंगा कोसी के कटाव के कारण वर्तमान में अस्तित्व में नहीं है। इनकी माता का नाम स्वर्गीय झालो देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय खंतर प्रसाद सिंह है। इनके पिताजी एक साधारण किसान थे। अपने चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर आने वाले परशुराम सिंह को घर के लोग प्यार से पारस के नाम से पुकारते थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा मध्य विद्यालय बकिया में हुई लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत खराब होने के कारण इन्हें आगे की पढ़ाई के लिए अपनी फुफू (बुआ) जागो देवी के यहां मनिहारी में चार वर्षों तक गुजारा करना पड़ा। 1971 में इन्होंने हेमचंद्र उच्च विद्यालय हेमकुंज, मनिहारी से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। इस दौरान इन्हें अपने हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रभाकर प्रसाद सिंह एवं भौतिकी शास्त्र के शिक्षक दिने...

41. उमेश सिंह

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक सदस्य एवं बरारी विधानसभा के अध्यक्ष, बरारी प्रखंड मत्स्यजीवी सहयोग समिति के मंत्री उमेश सिंह कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के लिए आंदोलन और मछुआरा समुदाय के लोगों के हक - हकूक़ के लिए लगातार संघर्ष करने के कारण सत्ता के गलियारों में एक क्रांतिकारी नेता की छवि रखते हैं। इनका जन्म 5 दिसंबर 1970 को काढ़ागोला के मिरकेल गांव में हुआ था। यह गांव 1999 में गंगा कोसी के कटाव की भेंट चढ़ गया। इनकी माता का नाम स्वर्गीय अहिल्या देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय छट्ठू प्रसाद सिंह है। इनके पिताजी राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। अपने छह भाई बहनों में पांचवें नंबर पर आने वाले श्री सिंह बचपन से एक मेधावी छात्र थे। इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा मध्य विद्यालय काढ़ागोला में हुई। 1986 में इन्होंने जागेश्वर उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया।  1986-88 में इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से इंटर किया। 1988-91 में इन्होंने रामबाग कॉलेज, पूर्णिया से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त किया। अपने छात्र जीवन में इन्हें जागेश्वर उच्...

बरारी के विधायक

2015 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवार नीरज यादव (राजद) ने इस सीट पर भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बिभास चंद्र चौधरी को हराकर जीत हासिल की।  NCP के Md शकूर तीसरे स्थान पर रहे।  2010 और अक्टूबर 2005 के राज्य विधानसभा चुनावों में, भाजपा के बिभाष चंद्र चौधरी ने बरारी विधानसभा सीट पर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एनसीपी के मोहम्मद शकूर को हराया।  अधिकांश वर्षों में प्रतियोगिताएं बहुस्तरीय थीं, लेकिन केवल विजेताओं और धावकों का उल्लेख किया जा रहा है।  फरवरी 2005 में राकांपा के मोहम्मद शकूर ने भाजपा के बिभाष चंद्र चौधरी को हराया। राजद के मंसूर आलम ने 2000 में राकांपा के मोहम्मद शकूर को हराया। जदयू के मंसूर आलम ने 1995 में भाजपा के विभा चंद्र चौधरी को हराया। निर्दलीय, जदयू के मंसूर आलम को हराया।  1990 में एलडी के मंसूर आलम ने 1985 में निर्दलीय प्रेम नाथ जायसवाल को हराया। कांग्रेस के करुणेश्वर सिंह ने 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर - चरण सिंह) की सपना देवी को हराया। जेपी के बासुदेव प्रसाद ने 1977 में निर्दलीय मंसूर आलम को हराया।  [2] [3]

40. नरेश यादव (राज्य सभा सांसद)

पूर्व राज्यसभा सांसद, सर्वोदय आश्रम कुर्सेला के अध्यक्ष एवं 1932 में महात्मा गांधी के द्वारा स्थापित हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गांधीवादी नरेश यादव आज भी अपने क्षेत्र के गरीबों, दलितों, पिछड़ों और लाचार लोगों की सशक्त और बुलंद आवाज के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।इनका जन्म 11 जुलाई 1950 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय चंद्रावती देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद यादव है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय अयोध्यागंज तीनघरिया से हुई। 1966 में अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय से उच्च माध्यमिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात उन्होंने पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया से 1967 में बी. ए. प्रीवियस और 1968-70 में कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से राजनीति शास्त्र में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त किया। 1970-72 में भागलपुर विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया और इसी दौरान इवनिंग कॉलेज के माध्यम से भागलपुर विश्वविद्यालय से ही एल.एल.बी. की डिग्री भी प्राप्त किया। 1972-74 के सत्र में भागलपुर विश्वविद्या...

39. दिगंबर कुमार

मूल रूप से दिघरी निवासी शिक्षक दंपत्ति योगेंद्र प्रसाद यादव एवं नूतन देवी का जेष्ठ पुत्र दिगंबर कुमार उर्फ विक्की नियोजित शिक्षकों के प्रतिनिधि एवं बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ मूल के जिला संयोजक के रूप में शिक्षक समाज के बीच अपनी पारदर्शी कार्यशैली और शिक्षक हित के लिए लगातार संघर्ष करने के कारण शिक्षक समाज में काफी लोकप्रिय व्यक्ति हैं।इनका जन्म 12 मार्च 1983 को ऑफिसर कॉलोनी कटिहार में हुआ था। अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़े दिगंबर बचपन से एक सिद्धांतवादी और संघर्षशील प्रवृत्ति के इंसान रहे हैं। **** में आदर्श हाई स्कूल कटिहार से मैट्रिक पास करने के पश्चात इन्होंने डीएस कॉलेज कटिहार से साइंस विषय से इंटर किया। **** में मगध विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में बैचलर डिग्री प्राप्त करने के पश्चात इन्होंने एरिना देहली से **** में मल्टीमीडिया एंड वेब डिजाइनिंग का कोर्स पूरा किया। 2007-12 में इन्होंने वेब डिजाइनर एंड टेक्निकल असिस्टेंट के रूप में दिल्ली में पांच वर्षों तक कार्य किया। 2012-14 के बीच इन्होंने जिला परिषद कटिहार में कार्यपालक सहायक के रूप में कार्य किया। इसी दौरा...

38. मनोज कुमार सिंह

अत्यंत गरीब परिवार से आने वाले मनोज कुमार सिंह 2017 और पुनः 2020 में जदयू (बरारी) के प्रखंड अध्यक्ष के रूप में मनोनीत होकर एकाएक बरारी विधानसभा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आ गये। 1 जनवरी 1979 को इनका जन्म एक अत्यंत साधारण सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में पिता स्वर्गीय छेदी प्रसाद सिंह और माता सुभद्रा देवी की चोथी संतान के रूप में हुआ। 1984 में इनके पिताजी की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जब इनकी आयु महज पांच वर्ष थी। ऐसे कठिन परिस्थितियों में इनकी माता ने गाय बकरी पोष कर इनका  लालन पालन किया। पारिवारिक जिम्मेारियों और आर्थिक समस्याओं के कारण बहुत ज्यादा पढ़ाई भी नहीं कर पाए लेकिन चाचा मेदनी प्रसाद मेहता की मदद से किसी प्रकार 1995 में हाई स्कूल प्रतापनगर, कदवा से इन्होंने मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण किया। इसके पहले 1990 में इन्हें मजदूरी करने पड़ोसी बच्ची मेहता के साथ शिमला भी जाना पड़ा। मैट्रिक पास करने के बाद एक बार फिर रोजी रोटी की तलाश में पड़ोसी लखन मृद्धा के साथ इन्हें दिल्ली जाना पड़ा। दिल्ली पहुंचकर शुरुवाती कुछ दिनों तक इन्हें कई रात भूखे भी गुजारना पड़ा। हालां...

37. रंजीत जायसवाल

बीसवीं शताब्दी के अस्सी के दशक में गंगा नदी के कटाव के कारण विस्थापित रेलवे के चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी जवाहर प्रसाद जायसवाल के तीसरी संतान के रूप में महज साढ़े छह माह तक माता श्रीमती परीणा देवी के गर्भ में रहने के पश्चात पंद्रह नवंबर 1979 को जन्म लेने वाले होनहार शख्स रंजीत जायसवाल उर्फ़ लालू के बारे में एक साधु ने आशीर्वाद देते हुए कहा था कि "जा बेटा मिट्टी का शेर बनेगा तू"।जवाहर नवोदय विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले और जवाहर नवोदय विद्यालय के विधि व्यवस्था की देखरेख के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गठित ऑल इंडिया एसोसिएशन आईना के सक्रिय रिप्रेजेंटेटिव, चेंबर ऑफ कॉमर्स कटिहार के कार्यकारिणी के निर्विरोध आमंत्रित सदस्य, जयसवाल स्वर्गीय सेवा मंच कटिहार के संस्थापक सह जिला अध्यक्ष, बिहार प्रदेश जयसवाल सर्ववर्गीय युवा महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्णिया प्रमंडल प्रभारी, लायंस क्लब कटिहार के सदस्य, कटिहार जिला के फुटबॉल कमेटी में उपाध्यक्ष, बिहार व्यापारी तंबाकू एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश सचिव, जदयू व्यवसायिक प्रकोष्ठ के महानगर अध्यक्ष रंजीत जयसवाल आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। ...

36. ब्रह्मानंद साह

मोहनाचांदपुर के मुखिया ब्रह्मानंद साह अत्यंत ही शांत एवं मिलनसार प्रवृत्ति के सज्जन व्यक्ति होने के बावजूद एक ऐसे पंचायत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, जो अक्सर ही आपराधिक गतिविधियों के कारण चर्चा में बना रहता है। गंगा कटाव की त्रासदी से पीड़ित इनका बचपन काफी अभाव और आर्थिक संकट के बीच गुजरता है। इनका जन्म 20 अगस्त 1952 को भवानीपुर में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय सुदामा देवी है। इनके पिताजी का नाम स्वर्गीय मोहनलाल सा है जिन्हें भवानीपुर पंचायत का सरपंच रहने का सौभाग्य प्राप्त था। ईश्वर की कृपा से इनका जन्म एक अत्यंत संपन्न परिवार में हुआ था। इनके पिताजी भवानीपुर बाजार में किराना और कपड़ा के थोक व्यापारी थे। उस समय कटिहार आज की तरह कोई शहर नहीं बल्कि एक सामान्य कस्बा था। साहिबगंज, धुलियान, मुर्शिदाबाद, कहलगांव आदि से भवानीपुर और जरलाही के व्यापारी सामान लाया करते थे। जब श्री साह की आयु महज सत वर्ष की थी तो इनका पुश्तैनी मकान और बीस एकड़ जमीन 1959-60 में गंगा के गर्भ में समा गया और इनका संपूर्ण परिवार विस्थापित होकर बेलिया में किसी प्रकार गुजर-बसर करने लगा। मध्य विद्यालय भवानीपुर से...

35. मनीष कुमार ठाकुर

संपूर्ण बिहार में भारतीय जनता पार्टी के सबसे युवा प्रखंड अध्यक्ष (समेली) बन कर महज बाइस वर्ष की आयु में तेज तर्रार और कर्मठ युवा नेता मनीष कुमार ठाकुर अचानक ही बरारी विधानसभा के राजनीतिक गलियारों में  2016 में चर्चा का विषय बन गए। इनका जन्म 15 दिसंबर 1993 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती ललिता देवी एवं पिता का नाम अशोक ठाकुर है। यह अपने माता पिता के पांच संतानों में सबसे छोटे संतान हैं। परिवार के बड़े बुजुर्ग इन्हें प्यार से मन्नू के नाम से पुकारते थे। दरअसल इनका यह नाम अरविंद ठाकुर (प्रधानाध्यापक) ने रखा था। शिक्षक का पेशा इनके परिवार का एक पुश्तैनी पेशा रहा है। इनके दादा जी स्वर्गीय इंद्रमोहन ठाकुर भी प्रधानाध्यापक के रूप में अपनी विशेष ख्याति रखते थे और इलाके में इन्हें गुरु जी के नाम से लोग पुकारते थे। इनके परदादा स्वर्गीय महावीर ठाकुर भी एक शिक्षक ही थे। इनके दादा के दादाजी स्वर्गीय बनवारी ठाकुर भी एक शिक्षक के रूप में समाज में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे। इनकी बुआ प्रेमलता देवी भी वर्तमान में बरारी के एक मध्य विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्य...