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Showing posts from February, 2020

33. प्रभात कुमार सिंह

कुर्सेला बाजार से महज थोड़ी दूरी पर, राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सुतारा मेंही मिशन स्कूल के संस्थापक निदेशक प्रभात कुमार सिंह ने अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा प्राप्त करने के लिए लालायित छात्र-छात्राओं को एक बेहतरीन शैक्षणिक संस्थान उपलब्ध करवाया है। पांच एकड़ से भी ज्यादा में फैले, सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाओं जैसे डिजिटल कलास रूम, साइंस लैबोरेट्री, कंप्यूटर लैब, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, पोस्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए कैंपस में ही कैंटीन की व्यवस्था, खेलने के लिए बड़ा सा खेल का मैदान, उच्च योग्यताधारी समर्पित कुशल शिक्षक/शिक्षकाएं और बिल्कुल ही भय मुक्त शैक्षणिक माहौल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। दरअसल अपने छात्र जीवन में एक हिंदी माध्यम विद्यालय से पढ़े होने के कारण श्री सिंह को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा और जब इन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम में मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में जॉइनिंग लिया तो वहां भी तमाम काबिलियत होने के बावजूद सिर्फ स्पोकन इंग्लिश कमजोर होने के कारण ऑफ...

34. चंद्र्किशोर तिवारी उर्फ चुनचुन सर

हंस एंड भवानी कोचिंग सेंटर, मधुबनी (सेमापुर) के संस्थापक निदेशक चंद्रकिशोर तिवारी उर्फ चुनचुन सर पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नवोदय विद्यालय में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद गरीब बच्चों को पढ़ाना अपना जीवन का उद्देश्य बना लिया। मधुबनी, गुंजरा, डहरा, भवानीपुर, काबर, लक्ष्मीपुर, पिपरिया टोला, सुखासन, इस्लामपुर, डुमरिया, परजेली, दुर्गापुर, आदिवासी टोला, सेमापुर बाज़ार, टिकटिकी पाड़ा, मखनाहाधार आदि के लगभग दो हजार से ज्यादा छात्र- छात्राओं को मैट्रिक परीक्षा पास करवा चुके श्री तिवारी के स्वयं का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है। इनका जन्म 7 मार्च 1980 को पटना सिटी में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। यह अपने दो भाईयों में छोटे थे। इनकी माता का नाम श्रीमती उर्मिला देवी और पिता का नाम चंद्रेश्वरी तिवारी है। इनके पिताजी मूलतः खड़गपुर गांव, महनार (वैशाली) के रहने वाले हैं लेकिन रोजी रोटी की तलाश में यह राजधानी में आकर एक छोटा सा होटल चलाते थे। श्री तिवारी का ननिहाल बावानगंज (सेमापुर) में है। 1984 में इनके मामाजी शत्रुघन तिवारी ने इनके पिताजी से आग्रह कर इनके पूरे परिवार को हमेशा...

32. शिक्षक नवीन चौधरी

अनिल सिंह हत्याकांड के पश्चात हुए ऐतिहासिक आंदोलन के नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले शिक्षक नवीन कुमार चौधरी आज भी अपने सामाजिक सरोकारों से संबंधी गतिविधियों के कारण युवा वर्ग में अपनी गहरी पैठ रखते है। इनका जन्म 1 मार्च 1978 को एक संपन्न परिवार में जरलही में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती उषा जायसवाल एवं पिता का नाम राजकुमार चौधरी है। दुर्भाग्यवश जब यह बहुत कम आयु के थे तो इनकी सारी पुश्तैनी जमीन गंगा कटाव के भेंट चढ गई। इस प्रकार बचपन के दिन इन्हें अचानक काफी तंगी में गुजारना को मजबूर होना पड़ा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय जरलाही ही में संपन्न हुई। गंगा की कटाव से पीड़ित होकर इनका परिवार बरारी प्रखंड मुख्यालय के समीप बस गया। इसके बाद आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार से इन्होंने अपना आगे का पढ़ाई किया और जगेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से 1993 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। कटिहार के प्रतिष्ठित की के बी झा महाविद्यालय से इन्होंने साइंस विषय से इंटर की पढ़ाई किया। इसी दौरान इनकी मित्रता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सेमापुर इकाई के न...

31. शिक्षक वीरेंद्र सिंह

सेवानिवृत्त शिक्षक सरदार विजय सिंह का जेष्ठ पुत्र सरदार वीरेंद्र सिंह ने एक प्रधानाध्यापक, प्रखंड साधन सेवी, संकुल समन्वयक एवं शिक्षक के रूप में अपने पारदर्शी कार्यप्रणाली और कर्मठता की बदौलत शिक्षा जगत में अपना विशिष्ट पहचान बनाया है। 2017 में कटिहार के जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित श्री सिंह का जन्म 10 जनवरी 1973 को लक्ष्मीपुर में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती आशा कौर है। इनके परिवार के लोग इन्हें प्यार से बिंटू पुकारा करते हैं। अपने चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर आने वाले श्री सिंह बचपन से एक मेधावी छात्र थे। 1987 में जागेश्वर उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के पश्चात इन्होंने 1989 में भगवती मंदिर कॉलेज से साइंस विषय से इंटर की डिग्री प्राप्त किया। कटिहार के प्रतिष्ठित दर्शन साह महाविद्यालय से 1993 में इन्होंने फिजिक्स ऑनर्स किया। इसके बाद इन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के साथ पिताजी के केला के खेती में सहयोग करना प्रारंभ कर दिया। 1999 में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा म...

30. गनौरी मोची

गनौरी मोची दाने दाने को मोहताज बकिया निवासी महादलित मजदूर परिवार का एक ऐसा होनहार छात्र जिसने अपने कठिन परिश्रम और लग्न की बदौलत फर्श से अर्श का सफर तय कर संघर्ष और सफलता का अद्भुत मिसाल प्रस्तुत किया है और यह साबित कर दिखाया कि -  "मेहनत वह सुनहरी चाबी है जो किस्मत के भाग को खोल देती है।" बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के 42वीं बैच के पदाधिकारी श्री मोची मार्च 2019 में झारखंड के उपनिदेशक सह उप सचिव योजना सह वित्त विभाग रांची से सेवानिवृत्त हुए हैं। इनका जन्म अत्यंत ही गरीब परिवार में 18 मार्च 1959 को बरारी प्रखंड के बकिया पंचायत में हुआ था। इनके पिता का नाम विशु मोची एवं माता का नाम कमला देवी है जो एक भूमिहीन मजदूर थे। इनके पिताजी गांव की संपन्न लोगों का जूता चप्पल मरम्मत किया करते थे जबकि माता गांव में महिलाओं के प्रसव कार्य में दाई का कार्य कर किसी प्रकार अपने बच्चों का भरण पोषण करती थी।गनोरी बचपन से ही एक मेधावी छात्र था। छोटी उम्र से बकरी चराना और अपने पिता के कार्यों में सहयोग करने के साथ-साथ या गांव में स्थित सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाया करता था। अपनी पढ़ाई के लिए आवश्यक ...

29. नरेंद्र कुमार उर्फ मुकेश

कटिहार के मशहूर अधिवक्ता, शिक्षाप्रेमी, समाजसेवी, गरीबों के हमदर्द, स्काटिश आइडियल स्कूल सेमापुर के संस्थापक निदेशक, बरेटा स्टेट झक्सू नारायण चौधरी के पौत्र स्मृति शेष नरेंद्र कुमार उर्फ मुकेश ने समाज के लोगों से जुड़कर आजीवन समाजसेवा के कार्यों में समर्पित रहे। इनका जन्म 15 नवम्बर 1969 को हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय नीलावती देवी और पिता का नाम स्वर्गीय महेंद्र नारायण चौधरी है। एक संपन्न परिवार के मेधावी छात्र होने के कारण इनकी प्रारंभिक शिक्षा अंग्रजी माध्यम के एम्स चिल्ड्रेन और मार्डन इंग्लिश स्कूल हजारीबाग से हुई। इन्होंने 1985 में सेमापुर स्थित उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया। इसके बाद संथाल परगना कॉलेज दुमका से इन्होंने इंटर से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पुरा किया। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से इन्होंने 1995 में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया। आगे चलकर भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा से ही इन्होंने एलएलबी की डिग्री भी हासिल किया। 26 अगस्त 1996 से इन्होंने व्यवहार न्यायालय कटिहार में अपना वकालत प्रारंभ किया। दरअसल वका...

28. स्वर्गीय मांगन साह

गंगा की तेज धार और अतीत की गहराइयों में कुछ ऐसे नाम हैं, जो वर्तमान में विलुप्त प्राय हैं। स्वर्गीय मांगन साह की एक दानदाता समाजसेवी छवि आज भी कुछ बुजुर्गों के कारण अपने अस्तित्व को बचाने में कामयाब है। 500 एकड़ जमीन के मालिक स्वर्गीय कुंजल साह के इकलौते पुत्र स्वर्गीय मांगन साह के प्रयास से वर्तमान में बरारी की एकमात्र बुनियादी विद्यालय राजकीय बुनियादी विद्यालय, कुंज नगर गुरुमेला की शुरुआती नीव रखी गई थी। आजादी के पूर्व साढ़े तीन एकड़ भूमि दान देकर मध्य विद्यालय भरौली का निर्माण करवाया था। इस विद्यालय का संचालन भी इन्हें अपने निजी फंड से करना पड़ता था। देश की आजादी के बाद। 1957 के आसपास इन्होंने पुनः साढ़े तीन एकड़ जमीन दान देकर इसे बुनियादी विद्यालय में परिणत करवाने का कार्य किया था। इसके पूर्व इनके द्वारा एक एकड़ भूमि दान देकर प्राथमिक विद्यालय गुरु मेला का भी निर्माण करवाया गया था। पंचगछिया प्राथमिक विद्यालय का निर्माण भी इनके द्वारा दान दिये गए एक एकड़ ज़मीन पर हुआ था। दुर्भाग्यवश गंगा के प्रचंड कटाव में यह सभी पूर्व निर्मित विद्यालय नष्ट हो गए। राजकीय बुनियादी विद्यालय कुंजनगर, ग...

27. रवीश किशोर

अपने जमाने के जाने-माने पत्रकार एवं कवि रतन किशोर के ज्येष्ठ पुत्र, बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में उप सचिव के रूप में कार्यरत रविश किशोर ने 2000 में बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन के 42 वीं बैच की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने क्षेत्र के लोगों को  गौरवान्वित किया है। इनका जन्म 10 जनवरी 1971 को एक सामान्य परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती गीता रानी है। इनके पिताजी स्वर्गीय रतन किशोर एक पत्रकार और समाज सेवी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे। इनका प्रारंभिक शिक्षा आदर्श मध्य विद्यालय गुरु बाजार से हुई। 1984 में झक्सु नारायण उच्च विद्यालय सेमापुर से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण किया। 1986 में इन्होंने कटिहार के प्रतिष्ठित महाविद्यालय डीएस कॉलेज से साइंस विषय से इंटर की परीक्षा पास किया। 1991 में पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इन्होंने बॉटनी ऑनर्स की डिग्री प्राप्त किया। 1993 में इसी महाविद्यालय से इन्होंने बॉटनी से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किया। 1995 में पटना विश्वविद्यालय से B.Ed का कोर्स पूरा किया और 1999 में बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर शिक्षक...

jnc

1958 में सेमापुर बाजार में पूर्व में चल रहे हाई स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण बच्चों की शिक्षा में काफी परेशानी आ रही थी। ऐसे में श्री चौधरी ने अपने पिता से आग्रह कर पांच एकड़ जमीन विद्यालय को दान में दिलवाया। भूमि दाता होने के कारण श्री चौधरी के पिताजी को विद्यालय प्रबंधन समिति का सचिव बनाया गया लेकिन सारा कामकाज इन्हें ही देखना होता था। इन्हीं के सुझाव पर इस विद्यालय का नाम इनके दादाजी  स्वर्गीय झकसु नारायण चौधरी के नाम पर रखा गया। 1958-60 में तिर्थानंद झा और 1960 में राजेंद्र प्रसाद चौधरी को विद्यालय का प्रधानाध्यापक बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजेंद्र प्रसाद चौधरी के प्रधानाध्यापक बनने के पश्चात ही इस विद्यालय में नामांकन हेतु प्रवेश परीक्षा का आयोजन होने लगा और यह विद्यालय अपने अनुशासन और पढ़ाई के लिए संपूर्ण बिहार में अपनी विशेष पहचान बनाने में सफल रहा। श्री चौधरी के प्रयास के पश्चात इस विद्यालय में स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति हो पाई और उनके लिए ईपीएफ की सुविधा भी उपलब्ध करवाया जा सका।

26. प्रवीण कुमार मेहता उर्फ बब्लू

सावित्री ग्लोबल पब्लिक स्कूल बरारी कटिहार के मैनेजिंग डायरेक्टर, लक्ष्मीपुर पंचायत के पूर्व उप मुखिया एवं कृषि क्षेत्र में अभिनव प्रयोग के लिए पूरे इलाके में प्रसिद्ध प्रवीण कुमार मेहता उर्फ बब्लू मेहता बरारी विधानसभा के लोगों के लिए एक जाना पहचाना नाम है। इनका जन्म 26 अप्रैल 1969 को एक संपन्न किसान परिवार में में हुआ था। इनके दादाजी स्वर्गीय राम लाल मंडल लगभग 800 बीघा जमीन के मालिक थे। इनकी माता का नाम सावित्री देवी है। इनके पिताजी का नाम स्वर्गीय श्री पति मेहता है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गुरु नानक मध्य विद्यालय गुरु बाजार एवं आदर्श मध्य विद्यालय बरारी से हुई।1985 में इन्होंने जागेश्वर उच्च विद्यालय गुरु बाजार से मैट्रिक की परीक्षा पास किया।1987 में भगवती मंदिर कॉलेज बरारी से इन्होंने आर्ट्स विषय से इंटर की पढ़ाई पूरी किया। 1989 में इन्होंने कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना से आर्ट्स विषय से स्नातक की डिग्री हासिल किया। पिताजी की बीमारी के कारण इन्हें वापस अपने गांव लौट आना पड़ा। अपने छात्र जीवन में इन्हें अर्थशास्त्र के शिक्षक उदित नारायण यादव एवं जागेश्वर उच्च विद्यालय बरारी के प्रधानाध्यापक खगे...

25. कारुनेश्वर सिंह

अपने संपर्क में आने वाले लोगों का हर संभव मदद करने वाले, जनहित से संबंधित अपने काम और व्यवहार से बरारी की जनता के दिलों में राज करने वाले पूर्व राज्य मंत्री करुनेश्वर सिंह (ग्रामीण विकास विभाग स्वतंत्र प्रभार)   बरारी विधानसभा के सभी वर्गों विशेषकर गरीबों, किसानों, दलितों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। इनका जन्म 8 जनवरी 1944 को एक संपन्न किसान परिवार में बल्थि महेशपुर, कुर्सेला में हुआ था। इनकी माता का नाम श्रीमती रामपड़ी देवी है। कुर्सेला में स्थित रामपड़ी कॉलेज की भूमि दाता इनकी माता ही है। इनके पिता जी का नाम योगेश्वर प्रसाद सिंह है। इनके पिताजी एक स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें 1932 में बरारी कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने का सौभाग्य प्राप्त था।श्री सिंह की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय बलथी महेशपुर में हुई। 1960 में कुर्सेला स्थित अयोध्या प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय से इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया में दाखिला लिया। आगे चलकर इन्होंने डीएस कॉलेज कटिहार में भी पढ़ाई किया। 1967 में माइनिंग इंस्टिट्यूट ऑफ कोडरमा से चार वर्षीय माइनिंग...

फाइनल स्टोरी

1. प्रेम नाथ जायसवाल 2. नीरज कुमार 3. मंसूर आलम 4. करूनेश्वेर सिंह (मनीष सिंह) 5. संयोगिता सिंह 6. राजीव कुमार जायसवाल 7. नियामातुर रहमान 8. भागवत प्रसाद यादव 9. शालिग्राम यादव 10. विभाष चन्द्र चौधरी 11. तौकीर आलम 12. अल्तमश दीवान 13. विश्वनाथ चौधरी 14. राकेश रौशन 15. उषा जायसवाल (नवीन चौधरी) 16. लक्ष्मी नारायण मंडल 17. बबीता कश्यप 18. जय नारायण चौधरी 19. राजेंद्र नारायण चौधरी 20. बालमुकुंद टिबड़ेवाल

24. मनीष सिंह उर्फ पप्पू सिंह

जनता दल यूनाइटेड के वर्तमान जिला उपाध्यक्ष सह प्रखंड प्रमुख कुर्सेला मनीष कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह को समाज सेवा और राजनीति अपने पिता पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री बिहार सरकार करुनेश्वर सिंह से विरासत में प्राप्त हुई है। अपने पिता के चार संतानों में इकलौते पुत्र मनीष सिंह का जन्म 25 जनवरी 1967 को बल्थी महेशपुर में हुआ था। 1982 में अयोध्या प्रसाद उच्च विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा पास करने के पश्चात इन्होंने पटना के प्रसिद्ध वाणिज्य  महाविद्यालय से 1984 में इंटर, 1987 में बी. कॉम. और 1989 में एम. कॉम. की डिग्री प्राप्त किया। अपने छात्र जीवन से ही इन्हें नोकरी करने की जगह नियोक्ता बनने का जुनून था। स्नातक के पश्चात 1987 में गया में चार एकड़ पहाड़ बिहार सरकार से किराये पर लेकर (क्रेशर मशीन) स्टोन चिप्स की छोटी इकाई चलाने लगे, लेकिन दो वर्ष बाद ही पुरातत्त्व विभाग द्वारा दायर मुकदमा के आलोक में पहाड़ पर स्थित ब्रह्मयोगी मंदिर की सुरक्षा का हवाला देकर उनकी इकाई को बंद करवा दिया गया।बिहार सरकार के लघु उद्योग विभाग से वित्त प्रदत इकाई के अचानक बन्द हो जाने से इन्हें छह लाख का भारी नुक़सान हुआ...

23. लक्ष्मी नारायण मंडल

कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं जीवनपर्यंत सामंत वादियों से संघर्ष करने वाले, भगवती मंदिर कॉलेज बरारी के पूर्व प्राचार्य, 1978 से लगातार 22 वर्षों तक कुर्सेला प्रखंड के पूर्वी मुरादपुर (बसुहार) के मुखिया रहे लक्ष्मी नारायण मंडल एक प्रबुद्ध शिक्षाविद एवं कमजोर, लाचार लोगों के लिए संघर्ष करने वाले योद्धा के रूप में बरारी विधानसभा में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। इनका जन्म कटाव पीड़ित गरीब कृषक परिवार में 22 जुलाई 1948 को कुर्सेला के मजदिया गांव में हुआ था। इनकी माता का नाम स्वर्गीय यमुना देवी एवं पिता का नाम स्वर्गीय सौदागर प्रसाद मंडल है। यह अपने माता-पिता के आठ संतानों में दूसरे नंबर पर आते हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अपर प्राइमरी स्कूल बसुहार में हुई। 1967 में अयोध्या प्रसाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से इन्होंने साइंस विषय से फ्री यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास किया। 1969 में इन्होंने जयप्रकाश नारायण महाविद्यालय नारायणपुर में प्रवेश लिया लेकिन आर्थिक समस्याओं के कारण इन्हें तीन चार माह बाद ही वहां से वापस आना पड़ा।इसके पश्चात गजाधर भगत महाविद्यालय नवगछिया में इन्होंने नामांकन लेकर प्री...

अनापत्ति प्रमाणपत्र

*बरारी विधानसभा के शख्सियत पुस्तक में जीवनी प्रकाशन हेतु* *अनापत्ति प्रमाणपत्र/ सहमति प्रमाण पत्र* शख्सियत का नाम पिता का नाम आधार संख्या पता मैं                        ...

22. नियामातुर रहमान

गंगा यमुनी संस्कृति को सशक्त और सुदृढ़ करने के लिए अपनी खास पहचान रखने वाले 1978 से 2006 तक लगातार मरघिया पंचायत के मुखिया रहे जनाब नियामातुर रहमान का नाम बरारी विधानसभा के सत्ता ...